छत्तीसगढ़

संघर्ष से शिखर तक : तेंदूपत्ता चुनने वाले अजय गुप्ता अब संभालेंगे जंगलों की कमान

रायगढ़। छत्तीसगढ़ के वनांचल से एक ऐसी गौरवगाथा निकलकर सामने आई है, जिसने साबित कर दिया है कि अगर इरादे फौलादी हों तो अभावों के बीच भी सफलता का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है। रायगढ़ जिले के ग्राम सम्बलपुरी के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले अजय गुप्ता ने भारतीय वन सेवा (IFS) में चयनित होकर न केवल अपने क्षेत्र का, बल्कि पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है।

अभावों में बीता बचपन, मेहनत से संवारा भविष्य

अजय का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ जहाँ जीविकोपार्जन का मुख्य साधन जंगलों से तेंदूपत्ता और महुआ बीनना था। बचपन में वे स्वयं अपने माता-पिता के साथ वनों में जाकर वनोपज संग्रहण में हाथ बंटाते थे। आर्थिक चुनौतियां बहुत थीं, लेकिन अजय की मेधा और माता-पिता के पढ़ाई के प्रति समर्पण ने हार नहीं मानी।

अपनी शुरुआती शिक्षा के दौरान ही अजय ने अपनी प्रतिभा की चमक बिखेरी थी। 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने के बाद, उन्होंने एनआईटी (NIT) रायपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। अजय बताते हैं कि एनआईटी में दाखिले के बाद ही उनका दृष्टिकोण बदला और उन्हें अहसास हुआ कि वे भी देश की शीर्ष सेवाओं में जा सकते हैं।

सरकारी योजनाओं का मिला साथ

अजय की इस गौरवपूर्ण यात्रा में छत्तीसगढ़ शासन की कल्याणकारी योजनाओं ने एक मजबूत आधार स्तंभ का काम किया। अजय ने साझा किया कि:

लघु वनोपज संघ की छात्रवृत्ति ने स्कूली शिक्षा से लेकर कॉलेज तक उनके वित्तीय बोझ को कम किया।

पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से उन्हें निरंतर आर्थिक सहयोग प्राप्त हुआ, जिससे वे बिना किसी मानसिक दबाव के अपनी तैयारी पर ध्यान केंद्रित कर सके।

देश में हासिल की 91वीं रैंक

कठिन परिश्रम के दम पर अजय ने भारतीय वन सेवा की परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 91वीं रैंक हासिल की है। यह एक सुखद संयोग ही है कि जिस जंगल ने कभी उनके परिवार को रोटी दी, अब अजय उसी जंगल के संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदारी एक अधिकारी के रूप में निभाएंगे।

नेतृत्व की सराहना

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अजय की इस उपलब्धि को ‘वनाश्रित परिवारों के अटूट विश्वास की जीत’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि अजय जैसे युवाओं की सफलता यह दर्शाती है कि सही अवसर और सरकारी सहयोग मिलने पर ग्रामीण परिवेश की प्रतिभाएं भी आकाश छू सकती हैं।

वहीं, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने अजय को बधाई देते हुए कहा कि उनकी यह सफलता प्रदेश के उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो संसाधनों की कमी को अपनी कमजोरी मानते हैं।

युवाओं के लिए संदेश

अजय गुप्ता की कहानी यह सिखाती है कि जंगल सिर्फ पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि संभावनाओं का द्वार भी हो सकते हैं। आज वे उन लाखों अभ्यर्थियों के लिए एक आदर्श (Icon) बन चुके हैं, जो विपरीत परिस्थितियों में भी बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button