आपदा प्रबंधन पर अमित शाह की बड़ी बैठक: बाढ़ और लू से बचाव के लिए ‘ज़ीरो कैजुअल्टी’ का लक्ष्य

नई दिल्ली (एजेंसी)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को नई दिल्ली में एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें आगामी मानसून और भीषण गर्मी (हीटवेव) से निपटने की तैयारियों का विस्तृत जायजा लिया गया। बैठक का मुख्य उद्देश्य आपदाओं के दौरान जनहानि को शून्य पर लाना और राहत कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाना था।
बैठक के दौरान लिए गए मुख्य निर्णय और निर्देश निम्नलिखित हैं:
- पूर्वानुमान प्रणाली में बड़ा सुधार
गृह मंत्री ने निर्देश दिया कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और केंद्रीय जल आयोग (CWC) अपनी चेतावनी प्रणालियों को और अधिक आधुनिक बनाएं। अब मौसम और बाढ़ की भविष्यवाणियों की समय सीमा को 3 दिन से बढ़ाकर 7 दिन किया जाएगा, ताकि प्रशासन और आम जनता को तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
- विशेष टीमों का गठन और कृषि पर फोकस
बाढ़ संकट प्रबंधन टीमें (FCMT): देश के प्रत्येक राज्य में विशेष बाढ़ प्रबंधन टीमों के गठन पर जोर दिया गया।
कृषि सुरक्षा: हीटवेव के कारण खेती और फसलों को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए।
जमीनी स्तर पर सूचना: मौसम संबंधी चेतावनियों को केवल फाइलों तक सीमित न रखकर गांव और ब्लॉक स्तर तक पहुँचाने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने की बात कही गई।
- जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन
अमित शाह ने प्राकृतिक आपदाओं के दीर्घकालिक समाधान के लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर प्रकाश डाला:
चेक डैम और जल संचय: गिरते जलस्तर को सुधारने के लिए जल संचय परियोजनाओं और चेक डैम के निर्माण को गति दी जाएगी।
कैम्पा (CAMPA) फंड: पर्यावरण संरक्षण और संतुलन के लिए कैम्पा फंड का उचित और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
- तकनीकी और रणनीतिक कदम
खतरनाक झीलों की निगरानी: गृह मंत्री ने कम से कम 60 संवेदनशील और जोखिम वाली झीलों के लिए ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’ (पूर्व चेतावनी प्रणाली) विकसित करने के निर्देश दिए हैं।
एकीकृत जलाशय संचालन: सभी राज्यों में ‘स्टेट-लेवल इंटीग्रेटेड रिज़र्वॉयर ऑपरेशंस’ लागू करने को कहा गया है ताकि बांधों से पानी छोड़ने की प्रक्रिया को नियंत्रित और सुरक्षित बनाया जा सके।
नियमित समीक्षा: NDMA (राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण) के दिशानिर्देशों का पालन राज्य, जिला और नगर पालिका स्तर पर कड़ाई से हो, इसकी नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी।
निष्कर्ष: सरकार का पूरा जोर इस बात पर है कि आधुनिक तकनीक और बेहतर तालमेल के जरिए आपदाओं के प्रभाव को कम किया जाए और नागरिक सुरक्षा को सर्वोपरि रखा जाए।
















