पश्चिम एशिया में शांति की सुगबुगाहट : ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक हलचल तेज

नई दिल्ली (एजेंसी)। मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी संघर्ष और अस्थिरता को समाप्त करने के लिए एक बड़ी कूटनीतिक सफलता मिलने की उम्मीद जगी है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच जारी पर्दे के पीछे की बातचीत अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। सीएनएन की एक रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका द्वारा भेजे गए शांति प्रस्ताव पर ईरान गुरुवार तक अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया दे सकता है।
एक नए समझौते की ओर बढ़ते कदम
राजनयिक सूत्रों का कहना है कि हालांकि तेहरान अभी भी वाशिंगटन के प्रस्ताव के हर पहलू का बारीकी से अध्ययन कर रहा है, लेकिन दोनों देशों के बीच एक ‘प्रारंभिक समझ’ (Preliminary Understanding) विकसित होती दिख रही है। इस संभावित समझौते का मुख्य लक्ष्य वर्तमान क्षेत्रीय तनाव को कम करना और भविष्य में व्यापक परमाणु चर्चाओं के लिए एक मजबूत आधार तैयार करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह बातचीत सफल रहती है, तो यह इस दशक का सबसे बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम साबित हो सकता है। हालांकि किसी अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर होना अभी बाकी है, लेकिन दोनों पक्षों का रुख सकारात्मक बना हुआ है।
प्रस्तावित शांति योजना के मुख्य बिंदु
जानकारी के मुताबिक, यह पूरी वार्ता 14 सूत्रीय ‘मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) पर टिकी है। इस मसौदे की कुछ प्रमुख बातें इस प्रकार हैं:
तत्काल युद्धविराम: क्षेत्र में जारी सैन्य गतिविधियों पर तुरंत रोक लगाना।
परमाणु कार्यक्रम पर रोक: ईरान द्वारा अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को अस्थायी रूप से थामने पर सहमति।
प्रतिबंधों में ढील: इसके बदले में अमेरिका, ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को कम करेगा और उसकी फ्रीज की गई संपत्तियों को वापस करने की प्रक्रिया शुरू करेगा।
समुद्री सुरक्षा: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव कम करना ताकि वैश्विक तेल व्यापार और जहाजों की आवाजाही सुरक्षित हो सके।
कूटनीति के केंद्र में ट्रंप और उनकी टीम
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से हाल ही में सैन्य गतिविधियों में दी गई ढील इसी कूटनीतिक योजना का हिस्सा है। इस पूरी बातचीत की कमान स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर जैसे प्रमुख दूत संभाल रहे हैं, जो मध्यस्थों के माध्यम से ईरान के साथ सीधे संपर्क में हैं।
यदि यह समझौता धरातल पर उतरता है, तो इसे युद्ध समाप्ति की औपचारिक घोषणा माना जाएगा। परमाणु और अन्य तकनीकी विषयों पर अगले दौर की चर्चा के लिए इस्लामाबाद या जेनेवा जैसे शहरों को चुना जा सकता है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें ईरान के आने वाले जवाब पर टिकी हैं।
















