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महासमुंद एलपीजी घोटाला : खाद्य अधिकारी और गैस एजेंसी संचालक सहित 4 गिरफ्तार, करोड़ों की गैस ठिकाने लगाने की थी साजिश

महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में पुलिस ने एक बड़े और सुनियोजित एलपीजी चोरी घोटाले का भंडाफोड़ किया है। लगभग 1.5 करोड़ रुपये मूल्य की 92 टन एलपीजी गैस के अवैध गबन के मामले में पुलिस ने जिला खाद्य अधिकारी और गैस एजेंसी संचालक सहित चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।

पैसे की बंदरबांट और 80 लाख की गुप्त डील

पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि जब्त की गई गैस को खुर्द-बुर्द करने के लिए 80 लाख रुपये का सौदा तय हुआ था। इस पूरी साजिश को अंजाम देने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया गया। डील की रकम का वितरण कुछ इस प्रकार तय था:

अजय यादव (जिला खाद्य अधिकारी): 50 लाख रुपये।

पंकज चन्द्राकर (गौरव गैस एजेंसी संचालक): 20 लाख रुपये।

मनीष चौधरी (गैस चूल्हा विक्रेता): 10 लाख रुपये।

यह पूरी डील अभनपुर स्थित ठाकुर पेट्रोकैमिकल्स के साथ की गई थी, जहां गैस को अवैध रूप से खपाया जाना था।

मामले की पृष्ठभूमि: रक्षक ही बने भक्षक

इस पूरे विवाद की जड़ें दिसंबर 2025 में शुरू हुई थीं, जब सिंघोड़ा पुलिस ने एलपीजी से भरे 6 कैप्सूल ट्रक जब्त किए थे। सुरक्षा कारणों से पुलिस ने इन ट्रकों को सुरक्षित स्थान पर रखने के लिए कलेक्टर को पत्र लिखा था। कलेक्टर के निर्देश पर खाद्य विभाग ने जिम्मेदारी संभाली, लेकिन विभाग के अधिकारियों ने सुरक्षा के बजाय इसे कमाई का जरिया बना लिया।

मार्च 2026 में, खाद्य विभाग की मिलीभगत से इन ट्रकों को ठाकुर पेट्रोकैमिकल्स के प्लांट (ग्राम उरला, अभनपुर) भेज दिया गया, जहां से गैस चोरी का खेल शुरू हुआ।

कानूनी कार्रवाई और वर्तमान स्थिति

सिंघोड़ा पुलिस ने इस मामले में कठोर रुख अपनाते हुए BNS की विभिन्न धाराओं और आवश्यक वस्तु अधिनियम (EC Act) की धारा 3 व 7 के तहत मामला दर्ज किया है।

कुल आरोपी: 06

गिरफ्तार: 04 (अजय यादव, पंकज चन्द्राकर, मनीष चौधरी और एक अन्य)

फरार: 02 (पुलिस सरगर्मी से तलाश कर रही है)

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