ईंधन संकट : पीएम मोदी की सादगी की अपील का असर, अब साइकिल और स्कूटर पर दिख रहे मंत्री और जज

नई दिल्ली (एजेंसी)। वैश्विक स्तर पर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया में ईंधन की आपूर्ति को संकट में डाल दिया है। कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के कारण भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर भी भारी दबाव है। इस स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल और डीजल के विवेकपूर्ण उपयोग का आग्रह किया है। प्रधानमंत्री की इस मुहिम का असर अब शासन के उच्च स्तरों पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।
दिखावा नहीं, कर्तव्य: जब मंत्री और जज निकले सड़क पर
प्रधानमंत्री की अपील के बाद देश के कई रसूखदार व्यक्तित्व अपनी लग्जरी कारों और सरकारी काफिलों को छोड़कर सादगी अपना रहे हैं।
उत्तराखंड: यहाँ के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी इन दिनों चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। वे अपनी भारी-भरकम गाड़ियों को छोड़कर स्कूटर से सचिवालय जा रहे हैं। उनका कहना है कि यह मात्र कोई प्रचार स्टंट नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री की राष्ट्रहित में की गई अपील का सम्मान है।
मध्य प्रदेश: यहाँ न्यायपालिका से एक प्रेरक तस्वीर सामने आई, जहाँ मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस द्वारकाधीश बंसल अपनी कार छोड़कर साइकिल से कोर्ट पहुंचे।
दिल्ली सरकार का बड़ा निर्णय: अब गाड़ियों का होगा ‘कारपूल’
राजधानी में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ईंधन संरक्षण की दिशा में कड़े कदम उठाए हैं। उन्होंने मंत्रियों और विधायकों के लिए उपलब्ध सरकारी वाहनों की संख्या में कटौती करने का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सभी जनप्रतिनिधि और अधिकारी अब निजी वाहनों के बजाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट या कारपूलिंग को वरीयता देंगे, ताकि कम से कम तेल खर्च हो।
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश: काफिले हुए छोटे
यूपी में 50% कटौती: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक कड़ा निर्देश जारी करते हुए मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों के काफिले में गाड़ियों की संख्या को तत्काल प्रभाव से 50 प्रतिशत कम करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही, उन्होंने प्रदेश में ‘वर्क फ्रॉम होम’ और पीएनजी (PNG) के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही है।
एमपी में मोहन यादव का एक्शन: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी अपने सुरक्षा काफिले को 13 गाड़ियों से घटाकर मात्र 8 कर दिया है। उन्होंने अपने मंत्रियों को भी कम से कम वाहनों के साथ यात्रा करने की सलाह दी है।
महाराष्ट्र और केंद्र सरकार के कड़े रुख
ईंधन की बचत के लिए महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी हेलीकॉप्टरों और चार्टर्ड विमानों के उपयोग पर लगभग रोक लगा दी है। अब इनका उपयोग केवल आपातकालीन स्थितियों में ही होगा। मंत्रियों को निर्देश दिया गया है कि वे लंबी दूरी के लिए ट्रेन का सफर करें या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठकें निपटाएं।
वहीं, केंद्र सरकार के आईटी और विदेश मंत्रालय जैसे विभागों ने अपने कर्मचारियों के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ का विकल्प फिर से खोल दिया है। दफ्तरों में बिजली बचाने के लिए एसी (AC) के उपयोग को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
निष्कर्ष: इन प्रयासों का मुख्य उद्देश्य आम जनता को यह संदेश देना है कि वर्तमान वैश्विक आर्थिक स्थिति में ईंधन की एक-एक बूंद बचाना देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के समान है। सरकार का यह “लीड बाय एग्जांपल” (मिसाल पेश कर नेतृत्व करना) मॉडल जनता के बीच सकारात्मक संदेश दे रहा है।
















