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रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में युवक को मिला नया जीवन, 10 साल पुरानी गंभीर फेफड़ों की बीमारी से मिली मुक्ति

रायपुर। राजधानी के डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय ने एक बार फिर चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता साबित की है। अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने एक 25 वर्षीय युवक की अत्यंत जटिल सर्जरी कर उसे मौत के मुँह से बाहर निकाला है। यह युवक पिछले एक दशक से खांसी के साथ खून आने की गंभीर समस्या (हीमोप्टाइसिस) से जूझ रहा था।

क्या थी मरीज की स्थिति?

अभनपुर क्षेत्र का रहने वाला यह युवक बीते 10 वर्षों से फेफड़ों के संक्रमण से परेशान था। स्थिति तब भयावह हो गई जब उसे खांसने पर 50 से 70 मिलीलीटर तक खून आने लगा। पूर्व में टीबी का इलाज कराने और कई बड़े अस्पतालों के चक्कर काटने के बावजूद उसे कोई आराम नहीं मिला था। जांच में पता चला कि उसके दाहिने फेफड़े के निचले हिस्से में एक बड़ी कैविटी बन गई थी, जिसमें एस्परजिलोमा नामक खतरनाक फंगल इंफेक्शन फैल चुका था।

जटिल ‘लोबेक्टॉमी’ प्रक्रिया से बचाई जान

विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू के नेतृत्व में डॉक्टरों ने मरीज की जान बचाने के लिए आपातकालीन लोबेक्टॉमी (Lobectomy) करने का निर्णय लिया। इस प्रक्रिया में फेफड़े के केवल उस संक्रमित हिस्से को काटकर अलग किया जाता है जो बीमारी की जड़ होता है।

ऑपरेशन की मुख्य चुनौतियां:

यह एक हाई-रिस्क सर्जरी थी क्योंकि फेफड़ों की मुख्य धमनियों (पल्मोनरी आर्टरी और वेन) को नुकसान पहुँचने का खतरा था।

सर्जरी में आधुनिक लंग स्टेपलर गन तकनीक का प्रयोग किया गया ताकि ऑपरेशन के बाद हवा के रिसाव (Air leak) जैसी समस्या न हो।

आयुष्मान योजना से मिला मुफ्त उपचार

अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर और मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. विवेक चौधरी ने इस सफलता पर डॉक्टरों की टीम को बधाई दी। उन्होंने बताया कि यह जटिल ऑपरेशन आयुष्मान भारत योजना के तहत पूरी तरह निःशुल्क किया गया। मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

डॉक्टर की सलाह: खांसी के साथ खून आना (हीमोप्टाइसिस) फेफड़ों के कैंसर, टीबी या गंभीर संक्रमण का संकेत हो सकता है। इसे नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है। सही समय पर विशेषज्ञ की सलाह और आधुनिक तकनीक से इसका सफल उपचार संभव है।

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