मोदी कैबिनेट में बड़े बदलाव की तैयारी : मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड के आधार पर तय होगा भविष्य

नई दिल्ली (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के दो वर्ष अगले महीने पूरे होने वाले हैं। इस मील के पत्थर के साथ ही अब केंद्रीय मंत्रिपरिषद में विस्तार और फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा के नए संगठनात्मक ढांचे के गठन के साथ ही सरकार और संगठन के बीच चेहरों की अदला-बदली की जा सकती है।
परफॉर्मेंस के आधार पर छंटनी और पदोन्नति
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री कार्यालय और भाजपा आलाकमान मंत्रियों के कामकाज का विस्तृत ब्योरा तैयार कर रहा है। इस ‘रिपोर्ट कार्ड’ में केवल मंत्रालय का काम ही नहीं, बल्कि कई अन्य पहलुओं को भी शामिल किया गया है:
क्षेत्रीय सक्रियता: मंत्री अपने संसदीय क्षेत्र में कितने सक्रिय रहे और वहां की जनता से उनका जुड़ाव कैसा है।
योजनाओं का क्रियान्वयन: केंद्रीय जनकल्याणकारी योजनाओं को जमीन पर उतारने में मंत्री की भूमिका।
संगठनात्मक योगदान: पार्टी की बैठकों में उपस्थिति और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद का स्तर।
राज्यवार फीडबैक: प्रदेश इकाइयों से मंत्रियों के आचरण और छवि को लेकर आंकड़े जुटाए जा रहे हैं।
संगठन और सरकार में तालमेल की रणनीति
माना जा रहा है कि भाजपा इस बार ‘युवा और अनुभवी’ नेताओं के मिश्रण पर ध्यान केंद्रित कर रही है। संगठन को मजबूती देने के लिए कुछ कद्दावर मंत्रियों को कैबिनेट से हटाकर पार्टी की जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं। वहीं, हाल के चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों, विशेषकर पश्चिम बंगाल, को कैबिनेट में अधिक प्रतिनिधित्व मिलने की प्रबल संभावना है।
बढ़ सकती है मंत्रियों की संख्या
वर्तमान में मोदी सरकार के मंत्रिपरिषद में कुल 72 मंत्री शामिल हैं। संवैधानिक नियमों के अनुसार, यह संख्या 81 तक जा सकती है। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनावों और 2029 की चुनावी रणनीति को ध्यान में रखते हुए नौ नए चेहरों को जगह दी जा सकती है या रिक्त पदों को भरा जा सकता है।
मुख्य बिंदु: पिछले कार्यकाल की तरह इस बार भी सरकार के दो साल पूरे होने पर ही बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। इस कवायद का मुख्य उद्देश्य प्रशासन में नई ऊर्जा फूंकना और आगामी चुनावी चुनौतियों के लिए पार्टी को तैयार करना है।
















