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ऊर्जा सुरक्षा की ओर भारत का बड़ा कदम : ओमान से सीधे जुड़ेगी गैस पाइपलाइन

नई दिल्ली (एजेंसी)। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट और समुद्री मार्गों में बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बढ़ाने के लिए एक व्यापक योजना पर काम शुरू किया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे संवेदनशील जलमार्गों पर निर्भरता कम करने के लिए केंद्र सरकार अब समुद्र के रास्ते सीधे खाड़ी देशों से गैस मंगाने की तैयारी कर रही है।

मिडल ईस्ट-इंडिया डीप-वाटर पाइपलाइन (MEIDP): एक नजर में

पेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, ओमान से भारत के गुजरात तट तक लगभग 2,000 किलोमीटर लंबी समुद्री पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

बजट और समय: इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 40,000 करोड़ रुपये है। मंजूरी मिलने के बाद इसे पूरा होने में 5 से 7 साल लग सकते हैं।

अभूतपूर्व गहराई: यह पाइपलाइन समुद्र तल से 3,450 मीटर नीचे तक जाएगी, जो इसे दुनिया की सबसे गहरी समुद्री पाइपलाइनों की सूची में शामिल करेगी।

क्षमता: इसके माध्यम से भारत प्रतिदिन लगभग 3.1 करोड़ मानक घन मीटर (MMSCMD) प्राकृतिक गैस प्राप्त कर सकेगा।

इस प्रोजेक्ट की आवश्यकता क्यों?

भारत में प्राकृतिक गैस की मांग तेजी से बढ़ रही है। 2030 तक खपत 300 MMSCMD तक पहुँचने का अनुमान है। वर्तमान में भारत अपनी जरूरत की अधिकांश गैस ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के रास्ते आयात करता है। हालिया ईरान-इजरायल संघर्ष और वैश्विक अस्थिरता के कारण जब यह मार्ग बाधित हुआ, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतें दोगुनी (12 डॉलर से बढ़कर 25 डॉलर प्रति MMBtu) हो गई थीं।

एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “स्पॉट मार्केट की अनिश्चितता से बचने के लिए एक समर्पित पाइपलाइन जरूरी है। इससे बिना किसी मध्यस्थ देश या चोक पॉइंट के हमें सस्ती और निरंतर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित होगी।”

ऊर्जा भंडारण में चीन से मुकाबला

चीन ने पिछले वर्षों में रूस और मध्य एशिया के साथ कई जमीनी पाइपलाइन नेटवर्क तैयार किए हैं, जिससे वह समुद्री संकटों के प्रति कम संवेदनशील है। चीन की गैस भंडारण क्षमता 2026 तक 80 BCM होने की उम्मीद है, जबकि भारत के पास फिलहाल रणनीतिक गैस भंडार की कमी है। इसी अंतर को पाटने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने GAIL और इंडियन ऑयल जैसी कंपनियों को इस पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का जिम्मा सौंपा है।

तकनीकी आधार और भविष्य की संभावना

यह योजना ‘द साउथ एशिया गैस एंटरप्राइज’ (SAGE) द्वारा किए गए प्रारंभिक अध्ययन पर टिकी है। SAGE ने पहले ही गहरे समुद्र में पाइप बिछाने की व्यवहार्यता का परीक्षण कर लिया है। सफल होने पर, यह पाइपलाइन भविष्य में न केवल ओमान बल्कि यूएई, सऊदी अरब और कतर जैसे गैस संपन्न देशों को भी भारत से जोड़ सकती है।

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