तकनीक और दूरदर्शिता का संगम : सीएम साय की समीक्षा बैठक ने पेश किया सुशासन का अनूठा मॉडल

रायगढ़। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की प्रशासनिक कार्यशैली में एक बार फिर संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की अनूठी झलक देखने को मिली। रायगढ़ के सृजन सभाकक्ष में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने रायगढ़, जांजगीर-चांपा और कोरबा जिलों में चल रहे विकास कार्यों तथा प्रशासनिक कामकाज का व्यापक जायजा लिया। इस बैठक की खास बात यह रही कि इसमें प्रशासनिक कार्यकुशलता के साथ-साथ सरकारी संसाधनों की बचत का एक बेहतरीन संतुलन नजर आया।
संसाधनों की बचत और तकनीक पर जोर
मुख्यमंत्री ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि सरकारी कामकाज में फिजूलखर्ची रोकने, ईंधन और ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देने तथा आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए। इसी सोच को धरातल पर उतारते हुए, इस समीक्षा बैठक में जांजगीर-चांपा और कोरबा जिलों के आला अफसरों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जोड़ा गया।
बैठक में केवल संबंधित जिलों के कलेक्टर्स और पुलिस अधीक्षकों (SPs) को ही व्यक्तिगत रूप से बुलाया गया था, जबकि बाकी तमाम विभागीय अधिकारी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। इस दूरदर्शी कदम से अधिकारियों के लंबे सफर में खर्च होने वाले पेट्रोल-डीजल की भारी बचत हुई। यह पहल प्रशासनिक स्तर पर कम खर्च में बेहतर नतीजे देने वाली कार्यसंस्कृति की एक शानदार मिसाल है।
पर्यावरण और आर्थिक संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी
बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ योजनाओं को लागू करना ही नहीं है, बल्कि जनता के संसाधनों का समझदारी से उपयोग करना भी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज के दौर में ईंधन की बचत करना सिर्फ पैसों की बचत नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति हमारा एक बड़ा सामाजिक दायित्व भी है।
श्री साय ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे तकनीक का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल कर सरकारी कामकाज की रफ्तार बढ़ाएं और उसमें पारदर्शिता लाएं। उन्होंने कहा कि जहां भी मुमकिन हो, वहां ऑनलाइन मीटिंग्स, डिजिटल मॉनिटरिंग और आपसी समन्वय को प्राथमिकता दी जाए, ताकि समय और पैसा दोनों बचाया जा सके।
जनसमस्याओं के त्वरित समाधान के निर्देश
इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने तीनों जिलों में चल रहे विकास प्रोजेक्ट्स, जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति, निर्माण कार्यों के स्तर और राजस्व से जुड़े मामलों के निपटारे की गहन समीक्षा की। इसके साथ ही ‘सुशासन तिहार’ के दौरान आम जनता से मिले आवेदनों पर हुई कार्रवाई की भी जानकारी ली गई। उन्होंने अधिकारियों को सख्त लहजे में कहा कि वे जमीन पर उतरकर काम करें और जनता की शिकायतों का तुरंत समाधान सुनिश्चित करें।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का यह कदम दिखाता है कि वे एक व्यावहारिक और भविष्य की सोच रखने वाले जननेता हैं। तकनीक के सहारे समय प्रबंधन, सुशासन और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ साधने का यह नया मॉडल राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को एक नई दिशा दे रहा है।
















