बस्तर में नए सवेरे की शुरुआत : केंद्रीय गृह मंत्री ने की नक्सल मुक्त भारत और ‘शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा’ की घोषणा

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में आयोजित एक विशेष गरिमामयी कार्यक्रम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने नक्सल हिंसा के पीड़ितों, शहीद जवानों के परिवारों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के अधिकारियों व जवानों से सीधा संवाद किया। इस उच्च स्तरीय बैठक में राज्य के उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, केंद्रीय गृह सचिव श्री गोविंद मोहन, आईबी निदेशक श्री तपन डेका सहित कई नक्सल प्रभावित राज्यों के पुलिस महानिदेशक और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
तीन साल में पूरा हुआ नक्सल मुक्ति का संकल्प
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने गर्व के साथ घोषणा की कि भारत अब पूरी तरह से नक्सलवाद की समस्या से मुक्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि जिस समस्या को देश तीन पीढ़ियों से झेल रहा था और जो बस्तर के युवाओं के भविष्य के लिए एक दुःस्वप्न बनी हुई थी, उसे देश के वीर जवानों ने महज तीन वर्षों के भीतर समूल नष्ट कर दिया।
इस ऐतिहासिक सफलता के सफर को रेखांकित करते हुए उन्होंने तीन प्रमुख तिथियों का विशेष उल्लेख किया:
21 जनवरी 2024: छत्तीसगढ़ में नई सरकार के गठन के बाद नक्सल उन्मूलन की दिशा में पहली रणनीतिक बैठक हुई।
24 अगस्त 2024: संकल्प लिया गया कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म किया जाएगा।
31 मार्च 2026: नक्सल मुक्त बस्तर का लक्ष्य आखिरकार पूरी तरह साकार हुआ।
‘शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा’ से होगा बस्तर का कायाकल्प
सुरक्षा बलों की चौकियों को विकास के केंद्रों में तब्दील करने की एक बड़ी योजना के तहत बस्तर में ‘शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा प्रकल्प’ की शुरुआत की गई है। छत्तीसगढ़ में सक्रिय करीब 200 CAPF कैंपों में से 70 कैंपों को इस विशेष सेवा डेरा के रूप में विकसित किया जाएगा।
विकास का नया मॉडल: इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 371 सरकारी योजनाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा। यहाँ जन सेवा केंद्रों से राशन व आवश्यक पहचान पत्र (जैसे नागरिक दस्तावेज) बन सकेंगे, बैंकिंग और स्वास्थ्य सेवाएं संचालित होंगी, दुग्ध संकलन केंद्र और कृषि मार्गदर्शन केंद्र खुलेंगे, साथ ही युवाओं के लिए कौशल विकास और बुजुर्गों के लिए प्रौढ़ शिक्षा की व्यवस्था की जाएगी। अगले तीन महीनों में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (NID) की मदद से इसका पूरा खाका तैयार कर लिया जाएगा।
पुनर्वास और मुख्यधारा में लौटने की विस्तृत योजना
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि विकास की कमी नक्सलवाद का कारण नहीं थी, बल्कि नक्सली हिंसा ही इस क्षेत्र में विकास की राह में सबसे बड़ा रोड़ा थी। अब जब यह हिंसा समाप्त हो चुकी है, तो बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाने की तैयारी है।
हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले 3,000 पूर्व नक्सलियों के लिए केंद्र सरकार ने एक व्यापक पुनर्वास योजना बनाई है। शुरुआती तौर पर इसके लिए ₹20 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है, जिसका उपयोग उनके कौशल विकास, शिक्षा और उन्हें समाज में एक सम्मानित जीवन देने के लिए किया जाएगा। गृह मंत्री ने स्थानीय समाज से भी अपील की कि वे इन लोगों को बड़े दिल से स्वीकार करें।
विशेष अभियानों के वीरों को श्रेय
इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय गृह मंत्री ने सुरक्षा बलों के साहसिक अभियानों को दिया। उन्होंने ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ का विशेष रूप से उल्लेख किया, जिसमें जवानों ने 45 डिग्री के भीषण तापमान, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और बारूदी सुरंगों के खतरों के बीच नक्सलियों को उनके सुरक्षित ठिकानों (पहाड़ियों) से खदेड़ने का काम किया। इसके अलावा ऑपरेशन प्रहार, ऑक्टोपस और डबल बुल जैसे सामूहिक प्रयासों ने बिहार, झारखंड, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के पूरे बेल्ट को सुरक्षित बनाया।
उन्होंने इस लड़ाई में केंद्रीय बलों (CRPF, BSF, ITBP, SSB) के साथ-साथ छत्तीसगढ़ पुलिस, डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG), एसटीएफ और बस्तर फाइटर्स के आपसी तालमेल की जमकर सराहना की।
बस्तर की संस्कृति और समृद्धि की वापसी
अंत में गृह मंत्री ने बस्तर के उज्ज्वल भविष्य का भरोसा देते हुए कहा कि अब यहाँ कोई निर्दोष नागरिक अपनी जान नहीं गंवाएगा, स्कूल और बिजली की व्यवस्था सुचारू रहेगी और किसी भी किसान या तेंदूपत्ता संग्राहक की गाढ़ी कमाई का पैसा सीधे उनके बैंक खातों में जाएगा। ‘बस्तर ओलंपिक’ और ‘बस्तर पंडुम’ जैसे आयोजनों के माध्यम से यहाँ की समृद्ध कला, संगीत और पारंपरिक संस्कृति को फिर से जीवंत किया जा रहा है। 2047 तक ‘विकसित भारत’ के सपने को पूरा करने के लिए बस्तर का विकास पहली प्राथमिकता है।
















