जशपुर का नया कीर्तिमान : एक ही दिन में 2 लाख सीडबॉल रोपकर बनाया विश्व रिकॉर्ड

जशपुर। पर्यावरण की रक्षा और सामुदायिक एकजुटता की मिसाल पेश करते हुए जशपुर वनमंडल ने एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम की है। एक ही दिन के भीतर 2 लाख से ज्यादा सीडबॉल (बीज गोलों) का फैलाव और रोपण करके इस वनमंडल ने ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में अपनी जगह पक्की कर ली है।
इस ऐतिहासिक सफलता के उपलक्ष्य में बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की राज्य प्रमुख श्रीमती सोनल राजेश शर्मा ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की गरिमामयी मौजूदगी में जशपुर वनमंडल को इस विश्व रिकॉर्ड का आधिकारिक सर्टिफिकेट सौंपा। वनमंडल की तरफ से यह सम्मान डीएफओ (वनमण्डलाधिकारी) श्री शशि कुमार ने ग्रहण किया।
मुख्यमंत्री ने थपथपाई जशपुर की पीठ
इस शानदार कामयाबी पर वन विभाग और जिले के वासियों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रकृति को बचाना सिर्फ सरकार का काम नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज का सामूहिक कर्तव्य है। उन्होंने जशपुर में चले “बीज गोला बनाबो, जशपुर के जंगल ला बढ़ाबो” अभियान की तारीफ करते हुए कहा कि यह मुहिम जनभागीदारी से पर्यावरण संरक्षण का एक बेहतरीन मॉडल बनकर सामने आई है।
मुख्यमंत्री ने आगे जोड़ा कि जब शासन, प्रशासन और आम जनता किसी अच्छे काम के लिए एक साथ कदम बढ़ाते हैं, तो बड़े से बड़ा लक्ष्य भी आसान हो जाता है। उन्होंने कहा कि यह गौरव सिर्फ जशपुर का नहीं बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ का है, जो बाकी जिलों को भी हरियाली बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगा।
जनआंदोलन से बनी बात
जशपुर वनमंडल की इस विशेष मुहिम का मुख्य उद्देश्य जंगलों का दायरा बढ़ाना, जैव विविधता (biodiversity) को सुरक्षित रखना और प्रकृति के संतुलन को मजबूत करना है। इस अभियान की कामयाबी की सबसे बड़ी वजह इसका एक जनआंदोलन में बदलना रहा।
गांव के स्थानीय लोगों, स्कूली बच्चों, जनप्रतिनिधियों, महिला स्व-सहायता समूहों, सामाजिक संस्थाओं और वन विभाग की टीम ने मिलकर इस काम को अंजाम दिया। हजारों हाथों के एक साथ जुड़ने से यह पर्यावरण अभियान एक बड़े रिकॉर्ड में तब्दील हो गया, जिसने जशपुर को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दी है।
इस खास मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह सहित वन विभाग के अधिकारी, सामाजिक संगठनों के सदस्य और भारी संख्या में आम नागरिक मौजूद थे।
















