पंडवानी साम्राज्ञी डॉ. तीजन बाई को मुक्ताकाशी मंच से दी गई भावभीनी स्वरांजलि, गनियारी बनेगा ‘कलाग्राम’

रायपुर। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को वैश्विक पटल पर चमकाने वाली पंडवानी की शिखर साधिका, पद्म विभूषण स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई को राजधानी रायपुर के महंत घासीदास संग्रहालय परिसर में स्थित मुक्ताकाशी मंच पर एक भव्य सांगीतिक सभा में भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। लोककला, साहित्य और सांस्कृतिक जगत की नामचीन हस्तियों की मौजूदगी में हुए इस गरिमामय आयोजन में स्व. तीजन बाई के बेमिसाल योगदान को याद किया गया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप, संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने महान कलाकार की यादों को अक्षुण्ण रखने के लिए तीन बड़ी घोषणाएं कीं:
प्रतिवर्ष राज्य सम्मान: पंडवानी कला के संवर्धन के लिए अब हर साल डॉ. तीजन बाई के नाम पर ‘राज्य सम्मान’ दिया जाएगा।
गनियारी बनेगा कलाग्राम: उनके गृहग्राम गनियारी को एक आदर्श ‘कलाग्राम’ के रूप में विकसित किया जाएगा।
तंबूरे का संरक्षण: उनके प्रिय तंबूरे को महंत घासीदास संग्रहालय में सहेजकर प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि भावी पीढ़ियां प्रेरित हो सकें।
आर्थिक सहायता और जीवन वृत्तचित्र का विमोचन
श्रद्धांजलि सभा के दौरान संस्कृति मंत्री ने स्वर्गीय तीजन बाई की पुत्रवधु श्रीमती वेणु देशमुख को ₹1 लाख की सहायता राशि का चेक सौंपा। इसके साथ ही अतिथियों द्वारा तीजन बाई के जीवन सफर पर आधारित एक विशेष ब्रोशर का विमोचन किया गया और संस्कृति विभाग द्वारा निर्मित डॉक्यूमेंट्री (वृत्तचित्र) दिखाई गई, जिसने वहाँ उपस्थित सभी लोगों को भावुक कर दिया।
“स्वर कभी खामोश नहीं होते, वे समय की सीमाओं को लांघकर अमर हो जाते हैं। डॉ. तीजन बाई की आवाज छत्तीसगढ़ की लोकआत्मा का वो नाद है जो हमारी सांस्कृतिक चेतना में हमेशा गूंजता रहेगा।”
— श्री राजेश अग्रवाल, संस्कृति मंत्री
शिष्यों की स्वरांजलि से गूंजा मंच
सांगीतिक कार्यक्रम की शुरुआत लोक गायिका पुष्पा निषाद के गायन से हुई। इसके बाद स्व. तीजन बाई की शिष्याओं—तरूणा साहू, आराध्या साहू और दुर्गा साहू ने कापालिक शैली में तथा दुष्यंत द्विवेदी ने वेदमती शैली में दमदार पंडवानी प्रस्तुत कर अपनी गुरु को कलात्मक श्रद्धांजलि दी।
भारत रत्न देने की उठी मांग
कार्यक्रम में मौजूद दिग्गजों ने तीजन बाई से जुड़े संस्मरण साझा किए। लोक कलाकारों ने राज्य सरकार के समक्ष स्व. तीजन बाई को मरणोपरांत ‘भारत रत्न’ देने और उनके नाम पर एक पंडवानी एवं सांस्कृतिक विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा।
संस्कृति जगत की नामचीन हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस ऐतिहासिक सभा में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष श्री प्रभात मिश्रा, साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा, फिल्म विकास निगम की अध्यक्षा सुश्री मोना सेन सहित कई आयोगों के अध्यक्ष उपस्थित थे।
कला और साहित्य जगत से पद्मश्री ममता चंद्राकर, पद्मश्री भारती बंधु, पद्मश्री उषा बारले, पद्मश्री राधेश्याम बारले, परदेशीराम वर्मा, डॉ. सुशील त्रिवेदी, मीर अली मीर और रिखी क्षत्रीय सहित सैकड़ों संस्कृतिकर्मी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन श्री प्रभात मिश्रा और अरुण निर्मलकर ने किया, जबकि अंत में सुश्री मोना सेन ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि तीजन बाई की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
















