मध्य पूर्व में महायुद्ध : अमेरिका ने ईरान के 14 प्रांतों पर बरसाए बम, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारी तनाव

नई दिल्ली (एजेंसी)। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सैन्य टकराव बेहद आक्रामक मोड़ पर पहुंच गया है। दोनों देशों की ओर से एक-दूसरे पर विनाशकारी मिसाइल और ड्रोन हमले किए जा रहे हैं। अमेरिकी हवाई हमलों के पलटवार में ईरान ने खाड़ी के कई देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है, जिससे पूरे क्षेत्र में युद्ध की स्थिति बन गई है। इस भीषण टकराव के बीच ईरान ने एक बार फिर सामरिक रूप से महत्वपूर्ण जलमार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को पूरी तरह बंद करने का ऐलान कर दिया है।
अमेरिका का ईरान पर चौतरफा हवाई हमला
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा सोशल मीडिया पर दी गई जानकारी के अनुसार, रविवार से ईरान के खिलाफ एक नया और व्यापक हवाई अभियान शुरू किया गया है। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इन हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान के मिसाइल नेटवर्क, एयर डिफेंस सिस्टम और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की घातक स्पीडबोट्स को तबाह करना है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सैन्य कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए एक टेलीफोनिक इंटरव्यू में कहा, “हम उन्हें बेहद करारा जवाब दे रहे हैं।”
सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता टिम हॉकिन्स के मुताबिक, अमेरिकी वायुसेना ने कार्रवाई करते हुए ईरान की एक क्रूज मिसाइल और एक आत्मघाती ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया। लेबनानी मीडिया आउटलेट अल-मायादीन के अनुसार, अमेरिकी जेट और मिसाइलें अब तक ईरान के 14 अलग-अलग प्रांतों में बमबारी कर चुकी हैं।
ईरान के भीतर भारी तबाही और नुकसान
अमेरिकी बमबारी के बाद ईरान के तटीय और द्वीपीय क्षेत्रों में भारी धमाके सुने गए हैं। प्रमुख रूप से बंदर अब्बास, केश्म द्वीप, जास्क, सिरीक और बुशहर जैसे इलाके दहल उठे हैं।
सैन्य ठिकानों को निशाना: केश्म के गवर्नर हुसैन अमीर तैमूरी ने बताया कि द्वीप पर करीब 10 से 11 मिसाइलें गिरी हैं। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि ये हमले केवल सैन्य ठिकानों पर हुए हैं और आम नागरिक सुरक्षित हैं।
हताहतों की संख्या: ईरानी सरकारी मीडिया ‘इरना’ के अनुसार, होर्मोज्गान में अमेरिकी हमले के कारण एक मेंटेनेंस कर्मी की मौत हो गई और दो घायल हुए हैं। इसके अलावा, मशहर में एक वॉटर पंपिंग स्टेशन पर हुई बमबारी में एक व्यक्ति की जान गई है और चार अन्य जख्मी हुए हैं।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को ‘खुली आक्रामकता’ बताते हुए इसकी तीखी निंदा की है। ईरान ने यह भी आरोप लगाया कि मस्कट में ओमान के साथ चल रही समुद्री सुरक्षा वार्ता अमेरिकी दबाव के कारण ही विफल हुई है।
ईरान का पलटवार: पड़ोसी देशों में फैली जंग की आंच
अमेरिका के इस बड़े हमले से भड़के ईरान ने मध्य पूर्व के कई देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर रॉकेटों और ड्रोनों की बौछार कर दी है। ईरान ने दावा किया है कि उसने निम्नलिखित ठिकानों को निशाना बनाया:
जॉर्डन: अमेरिकी सेना का कमांड सेंटर
कुवैत: हिमार्स (HIMARS) मिसाइल लॉन्चिंग सिस्टम
ओमान: विमानवाहक पोत (एयरक्राफ्ट कैरियर) का सपोर्ट बेस
कतर: अमेरिकी फाइटर जेट्स का मेंटेनेंस हब
पड़ोसी देशों में हुआ नुकसान:
कुवैती रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उनकी तीन उत्तरी सीमा चौकियों और एक ऑफशोर ऑयल ड्रिलिंग प्लेटफॉर्म को नुकसान पहुंचा है, जिसमें एक कर्मचारी घायल हुआ है। वहीं, कतर ने ईरान को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि मिसाइल का मलबा गिरने से एक बच्चे सहित तीन लोग घायल हो गए हैं।
‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर आर-पार की जंग
इस समय वैश्विक तेल व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण रास्ता ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ मुख्य युद्धक्षेत्र बन चुका है। ईरान की ‘पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ ने स्पष्ट कर दिया है कि इलाके में अमेरिकी सेना की अवैध मौजूदगी को देखते हुए अब किसी भी कमर्शियल या सैन्य जहाज को यहां से गुजरने नहीं दिया जाएगा।
इसके विपरीत, अमेरिका ने ईरान के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। सेंट्रल कमांड ने बयान जारी कर कहा है कि इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर ईरान का कोई एकाधिकार नहीं है। जहाजों की आवाजाही पहले की तरह जारी है और अमेरिकी सेना नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैनात है।
















