‘मोर गांव-मोर पानी’ पहल से सुदृढ़ होती ग्रामीण अर्थव्यवस्था

जल संरक्षण के साथ किसानों की आजीविका को मिला नया संबल
रायपुर। राज्य शासन की ‘मोर गांव-मोर पानी’ योजना ग्रामीण इलाकों में जल संचयन, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने में बेहद कारगर साबित हो रही है। ‘विकसित भारत जी राम जी योजना’ के अंतर्गत जांजगीर-चांपा जिले में आजीविका से जुड़ी जल संरचनाओं का विकास किया जा रहा है, जिससे कृषि और मत्स्य पालन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ रही है।
47 आजीविका डबरियों की मिली स्वीकृति, 35 का काम पूरा
योजना के तहत जांजगीर-चांपा जिले में कुल 47 आजीविका डबरियों के निर्माण की मंजूरी प्रदान की गई थी। इनमें से 35 डबरियां पूरी तरह बनकर तैयार हो चुकी हैं और हालिया बारिश के पानी से लबालब भर गई हैं। इन जलाशयों से किसानों को पर्याप्त सिंचाई जल उपलब्ध हो रहा है, जिससे वे अपने कृषि क्षेत्र का विस्तार कर पैदावार बढ़ा पा रहे हैं। वर्तमान में 4 अन्य डबरियों का निर्माण कार्य भी तेजी से जारी है।
मत्स्य पालन और मेड़ों पर खेती से अतिरिक्त कमाई का जरिया
ये आजीविका डबरियां अब केवल पानी सहेजने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीणों की आय बढ़ाने का जरिया बन चुकी हैं। वर्तमान में 14 डबरियों का उपयोग मत्स्य पालन और कृषि आधारित गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। किसान इन डबरियों की मेड़ों पर दलहन, तिलहन और अन्य विविध फसलें उगाकर अतिरिक्त मुनाफा कमा रहे हैं।
भू-जल स्तर में सुधार और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
वर्षा जल संचयन के इस प्रयास से क्षेत्र के भू-जल स्तर में सुधार हुआ है और सिंचाई की क्षमता बढ़ी है। किसान अब साल भर खेती और मछली पालन जैसी गतिविधियों से जुड़कर अपनी आय में निरंतर बढ़ोतरी कर रहे हैं। ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान जनभागीदारी, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और ग्रामीण आजीविका के सशक्तिकरण का एक प्रमुख माध्यम बनकर उभरा है।
















