80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी का संबोधन : प्रगति, ऊर्जा क्रांति और स्वावलंबन पर केंद्रित रहा भाषण

नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत आज अपनी स्वतंत्रता की 80वीं वर्षगांठ मना रहा है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से लगातार 13वीं बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया और देशवासियों को संबोधित किया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने पिछले वर्षों में हुए विकास कार्यों, ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव, रेलवे विद्युतीकरण, आत्मनिर्भरता और वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की तैयारियों का उल्लेख किया।
पाइप्ड गैस की पहुंच 70 से बढ़कर 700 शहरों तक
प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 से पहले देश में पाइप से गैस पहुंचाने की सुविधा करीब 70 शहरों तक सीमित थी। पिछले 12 वर्षों में इसका विस्तार लगभग 700 शहरों तक किया गया है। उन्होंने कहा कि जहां पहले पाइप्ड गैस करीब 20 से 22 लाख घरों तक पहुंचती थी, वहीं अब लगभग 1.75 करोड़ घर इससे जुड़ चुके हैं।
उन्होंने इसे बड़े पैमाने पर किए गए काम और तेज गति से विकास का उदाहरण बताया।
सौर ऊर्जा में बड़ा विस्तार
प्रधानमंत्री ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि करीब 12 वर्ष पहले देश की सौर ऊर्जा क्षमता केवल 2 गीगावाट थी, जबकि अब 160 गीगावाट का लक्ष्य हासिल किया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि अक्षय ऊर्जा का लाभ मध्यम वर्ग और सामान्य परिवारों तक पहुंचे। इसी उद्देश्य से पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना शुरू की गई। प्रधानमंत्री के मुताबिक, इस योजना के तहत देश में 50 लाख घरों में सौर ऊर्जा अपनाने का माइलस्टोन पार हो चुका है।
रेलवे विद्युतीकरण की रफ्तार का दिया उदाहरण
रेलवे विद्युतीकरण को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में इसकी शुरुआत वर्ष 1925 में हुई थी, लेकिन लगभग 90 वर्षों में रेलवे नेटवर्क का केवल 30 प्रतिशत हिस्सा ही विद्युतीकृत हो पाया था।
उन्होंने कहा कि इसके मुकाबले पिछले 10 वर्षों में करीब 70 प्रतिशत रेलवे नेटवर्क का विद्युतीकरण किया गया। प्रधानमंत्री ने इसे तेजी से परिणाम देने वाले विकास मॉडल का उदाहरण बताया।
कोरोना और युद्धों के बीच भारत की तैयारियों का जिक्र
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 10 से 12 वर्षों के दौरान देश को कोरोना महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध के साथ-साथ पश्चिम एशिया में पैदा हुए तनाव जैसी कई वैश्विक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि इन संकटों के दौरान भारत के सामने कई तरह की आशंकाएं और अफवाहें भी फैलाई गईं। पेट्रोल, डीजल, गैस और यूरिया की उपलब्धता को लेकर लोगों में डर पैदा करने के प्रयास हुए, लेकिन पहले से की गई तैयारियों और नीतियों के कारण देश इन परिस्थितियों से मजबूती से निपटने में सफल रहा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश में गैस, पेट्रोल और यूरिया की पर्याप्त आपूर्ति है और भारत अपनी क्षमता के बल पर आगे बढ़ रहा है।
आत्मनिर्भरता को बताया बदलती वैश्विक व्यवस्था में जरूरी
प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया की परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। कई देश अब अपने राष्ट्रीय हितों और संसाधनों की सुरक्षा पर पहले से ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में संसाधनों का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए भी किया जा रहा है। पेट्रोलियम, डीजल, खाद, दवाइयों और तकनीक से लेकर चिप्स तक को लेकर वैश्विक स्तर पर रणनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि भारत ने पिछले एक दशक में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम नहीं बढ़ाए होते, तो ऐसी वैश्विक चुनौतियों का सामना करना और कठिन होता।
2047 के विकसित भारत के लक्ष्य पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने देशवासियों से विकास की इस यात्रा में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत को अपनी क्षमताओं, संसाधनों और तकनीकी सामर्थ्य को मजबूत करते हुए आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
















