VSK ऐप से फर्जी हाजिरी का मामला : स्कूल से गायब मिले शिक्षक, पोर्टल पर दर्ज मिली अटेंडेंस, 2 को नोटिस

कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कवर्धा ब्लॉक में शासकीय शिक्षकों की डिजिटल उपस्थिति दर्ज करने वाले ‘VSK ऐप’ की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में हुए प्रशासनिक निरीक्षण में यह खुलासा हुआ कि शिक्षक भौतिक रूप से शाला से नदारद थे, जबकि ऐप में उनकी उपस्थिति बाकायदा दर्ज दिखाई दे रही थी। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) ने दो शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 48 घंटे के भीतर जवाब मांगा है।
निरीक्षण में खुली पोल
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, 23 सितंबर 2026 को संकुल प्राचार्य और समन्वयक की टीम ने शासकीय शाला बिरनपुर का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान एक शिक्षिका बिना किसी पूर्व सूचना या स्वीकृत अवकाश के स्कूल से गायब पाई गईं। हालांकि, जब VSK पोर्टल की जांच की गई तो उसमें उनकी हाजिरी दर्ज मिली।
जांच में यह भी सामने आया कि उक्त शिक्षिका पूर्व में 22 सितंबर को हाफ डे के बाद और 29 सितंबर को दोपहर लगभग 12 बजे बिना अनुमति स्कूल से चली गई थीं, फिर भी ऐप में उनका चेक-आउट टाइम शाम 3:52 बजे दर्शाया गया था।
इसी तरह का दूसरा मामला शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला लिटीपुर में 25 अगस्त को सामने आया, जब सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी के निरीक्षण के समय एक शिक्षक अनुपस्थित मिले, लेकिन ऐप में उनकी हाजिरी लग चुकी थी।
विभागीय कार्रवाई और आशंका
बीईओ कार्यालय ने इन मामलों को घोर अनुशासनहीनता माना है। आशंका जताई जा रही है कि शिक्षकों की गैरमौजूदगी में किसी अन्य व्यक्ति द्वारा लॉगिन क्रेडेंशियल्स का उपयोग कर फर्जी उपस्थिति दर्ज की गई हो सकती है।
विभाग ने दोनों संबंधित शिक्षकों को नोटिस जारी कर स्पष्ट किया है कि यदि समय पर संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया, तो उनके खिलाफ कड़े अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएंगे। इस कार्रवाई की सूचना जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को भी भेज दी गई है।
ऑनलाइन सिस्टम की निगरानी पर उठे सवाल
इस घटनाक्रम के बाद VSK ऐप की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। चेक-इन और चेक-आउट सुविधा से लैस इस ऐप में तकनीकी खामी है या लॉगिन विवरण साझा कर गड़बड़ी की जा रही है, यह विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
गौरतलब है कि कवर्धा क्षेत्र में VSK ऑनलाइन उपस्थिति को लेकर पहले भी लापरवाही के मामले सामने आ चुके हैं, जिसके तहत बीते सितंबर महीने में कई शिक्षकों और कर्मचारियों का वेतन रोकने की कार्रवाई की गई थी।
















