नॉर्वे की नई पहल : 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेम्स पर रोक की तैयारी

नई दिल्ली (एजेंसी)। बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास पर डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए नॉर्वे सरकार सख्त कदम उठाने जा रही है। सरकार एक ऐसे कानून पर काम कर रही है, जिसके तहत 16 वर्ष से कम आयु के किशोरों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, मैसेजिंग ऐप्स और कुछ ऑनलाइन गेमिंग सेवाओं के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाई जा सकती है। यदि यह विधेयक संसद से पारित हो जाता है, तो टेक कंपनियों की जवाबदेही काफी हद तक बढ़ जाएगी।
टेक कंपनियों पर रहेगी उम्र सत्यापन की जिम्मेदारी
नए नियमों के अनुसार, टिकटॉक, स्नैपचैट और रोब्लॉक्स जैसे चर्चित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अपने यूजर्स की सटीक उम्र की जांच (Age Verification) करने का तंत्र विकसित करना होगा। नियमों का पालन न करने या लापरवाही बरतने वाली कंपनियों पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, किन-किन ऐप्स को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा, इसकी अंतिम सूची सरकार की ओर से आना अभी बाकी है।
वैश्विक स्तर पर बन रही है सहमति
कम उम्र में सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल से बच्चों की सुरक्षा और उनके व्यक्तिगत विकास पर असर पड़ता है। इसी चिंता को देखते हुए दुनिया भर के देश सख्त नियम बना रहे हैं:
ऑस्ट्रेलिया: 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर पहले ही कड़े प्रतिबंध लागू कर चुका है।
अन्य देश: ऑस्ट्रिया, ब्राजील और कनाडा जैसे देश भी बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों और डिजिटल पहुंच को सीमित करने के लिए कानूनी प्रक्रियाएं अपना रहे हैं।
नॉर्वे सरकार का यह कदम इस बात का संकेत है कि अब सिर्फ सोशल मीडिया ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स भी सरकारी निगरानी के दायरे में आ रहे हैं।
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