मध्य पूर्व में फिर गहराया तनाव : अमेरिका-इजरायल की सैन्य योजना पर ईरान की कड़ी चेतावनी

तेहरान (एजेंसी)। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ संभावित नए सैन्य हमलों की रिपोर्टों के सामने आने के बाद मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) में युद्ध के बादल एक बार फिर मंडराने लगे हैं। यह स्थिति ऐसे समय में बन रही है जब अमेरिका में मध्यावधि चुनाव की प्रक्रिया जारी है।
तनावपूर्ण माहौल के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद मुजतबा हुसैनी खमेनेई ने ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की।
द्विपक्षीय वार्ता और रणनीतिक समीक्षा
संसद अध्यक्ष गालिबाफ कतर और पाकिस्तान जैसे मध्यस्थ देशों के माध्यम से अमेरिका के साथ जारी बातचीत में ईरान का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस बैठक के दौरान संभावित अमेरिकी-इजरायली खतरों का विश्लेषण किया गया और देश की रक्षात्मक व सामरिक क्षमताओं को और मजबूत करने का संकल्प लिया गया।
सर्वोच्च नेता ने राष्ट्रीय एकता और सामाजिक एकजुटता बनाए रखने में जन प्रतिनिधियों के योगदान की सराहना की। इसके साथ ही, उन्होंने सशस्त्र बलों के समर्थन में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी को किसी भी संभावित हमले को रोकने वाला एक अहम कारक बताया। हालांकि, सुरक्षा कारणों से इस बैठक की कोई आधिकारिक तस्वीर साझा नहीं की गई।
क्या हैं अमेरिकी मीडिया के दावे?
‘द न्यू यॉर्क टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई बैठक के बाद ईरान के खिलाफ एक नई सैन्य रणनीति बनाई गई है। इस रणनीति के तहत ईरान के ऊर्जा संयंत्रों, परमाणु ठिकानों और मिसाइल व ड्रोन भंडारों को निशाना बनाए जाने की संभावना जताई गई है।
ईरान का रुख: अत्यंत कठोर कार्रवाई का अल्टीमेटम
संभावित हमलों के जवाब में ईरान ने बेहद सख्त रुख अपनाया है:
विनाशकारी जवाबी योजना: ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई ने स्पष्ट किया कि ईरानी सेना ने एक ऐसी अभूतपूर्व जवाबी रणनीति तैयार की है, जिसकी कल्पना भी हमलावरों ने नहीं की होगी।
व्यापक युद्ध की तैयारी: ईरान के सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, देश किसी भी बहुस्तरीय संघर्ष के लिए पूरी तरह तैयार है। यदि हमला होता है, तो इसका दायरा केवल हमलावर देशों तक सीमित न रहकर पूरे क्षेत्र में उनके सहयोगियों और हितों तक फैलेगा।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर का खतरा
दोनों पक्षों के बीच बढ़ती सैन्य तनातनी ने पूरे क्षेत्र को अस्थिरता की स्थिति में ला खड़ा किया है। जानकारों का मानना है कि यदि यह तनाव प्रत्यक्ष संघर्ष में बदलता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और ईंधन की कीमतों में जबरदस्त उछाल आ सकता है।
















