टेक जगत में बड़ा उलटफेर : जेमिनी एआई के को-लीड नोअम शजीर ने छोड़ा गूगल, अब ओपनएआई के साथ शुरू की नई पारी

नई दिल्ली (एजेंसी)। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की रेस में अग्रणी कंपनी गूगल को एक बड़ा रणनीतिक झटका लगा है। कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट (इंजीनियरिंग) और जेमिनी एआई मॉडल को तैयार करने में अहम भूमिका निभाने वाले दिग्गज वैज्ञानिक नोअम शजीर ने गूगल को अलविदा कह दिया है। उन्होंने अब गूगल की सबसे बड़ी प्रतिस्पर्धी और चैटजीपीटी (ChatGPT) की पैरेंट कंपनी ‘ओपनएआई’ (OpenAI) का दामन थाम लिया है।
सोशल मीडिया पर साझा की जानकारी
एआई की दुनिया में बेहद रसूखदार माने जाने वाले नोअम शजीर को टाइम मैगजीन ने इस क्षेत्र के 100 सबसे असरदार लोगों में जगह दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी इस नई पारी की घोषणा करते हुए लिखा कि वे ओपनएआई से जुड़कर बेहद उत्साहित हैं और वहां की बेहतरीन टीम के साथ काम करने को लेकर उत्सुक हैं। इसके साथ ही उन्होंने गूगल की टीम का आभार जताते हुए कहा कि वहां शानदार काम का अनुभव रहा और पुरानी टीम को छोड़ना एक कठिन निर्णय था।
सैम ऑल्टमैन की एक दशक पुरानी ख्वाहिश हुई पूरी
नोअम शजीर के ओपनएआई में शामिल होने पर कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सैम ऑल्टमैन ने अपनी खुशी जाहिर की। शजीर की पोस्ट का जवाब देते हुए ऑल्टमैन ने लिखा कि जब ओपनएआई की शुरुआत हुई थी, तब से ही नोअम उन चुनिंदा लोगों में शामिल थे जिनके साथ वे काम करना चाहते थे। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि भले ही इस तालमेल को हकीकत में बदलने में 10 साल लग गए, लेकिन यह इंतजार पूरी तरह वसूल होने वाला है।
22 हजार करोड़ रुपये की वह ऐतिहासिक डील
गूगल के साथ शजीर का सफर काफी दिलचस्प रहा है। वे साल 2000 में गूगल के शुरुआती दौर में कंपनी का हिस्सा बने थे। हालांकि, 2021 में उन्होंने एक चैटबॉट को पब्लिक न किए जाने के गूगल के फैसले से नाराज होकर इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उन्होंने अपनी खुद की कंपनी ‘कैरेक्टर डॉट एआई’ (Character.AI) बनाई।
नोअम की काबिलियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2024 में गूगल ने उन्हें वापस लाने के लिए करीब 2.7 बिलियन डॉलर (लगभग 22,000 करोड़ रुपये) की भारी-भरकम डील की थी। लेकिन गूगल के साथ उनकी यह दूसरी पारी ज्यादा लंबी नहीं चल सकी।
आधुनिक एआई के मुख्य शिल्पकार
नोअम शजीर को आज की एआई क्रांति का मुख्य जनक माना जाता है। वे 2017 के उस ऐतिहासिक रिसर्च पेपर के सह-लेखक थे, जिसने लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) की बुनियाद रखी थी। आज दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले चैटजीपीटी और जेमिनी जैसे आधुनिक एआई टूल उसी तकनीक पर काम करते हैं। शजीर का ओपनएआई में जाना एआई की इस वैश्विक जंग में एक नया मोड़ ला सकता है।














