बस्तर में शांति और विकास की नई सुबह : झीरम घाटी पहुंचे उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, शहीदों को अर्पित की श्रद्धांजलि

रायपुर। स्वाधीनता दिवस के पावन अवसर पर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा बस्तर स्थित झीरम घाटी पहुंचे। वहां उन्होंने अमर शहीदों को नमन करते हुए उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की और उनकी पावन स्मृति में पौधरोपण किया। इस दौरान गृह मंत्री ने घोषणा की कि शहीदों की याद में बने स्मारक को जल्द ही एक नया और भव्य स्वरूप दिया जाएगा, जिसके लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
वरिष्ठ जन प्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी रहे मौजूद
इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान क्षेत्रीय विधायक विनायक गोयल, जगदलपुर के महापौर संजय पांडे और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ बस्तर संभाग के कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी बीएन मीणा, कलेक्टर आकाश छिकारा तथा पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
शहीदों के त्याग को नमन और परिजनों का सम्मान
उप मुख्यमंत्री ने झीरम की दर्दनाक घटना को राज्य के इतिहास की सबसे बड़ी विभीषिका बताया। उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश पूर्व मंत्री स्व. नंदकुमार पटेल और पूर्व नेता प्रतिपक्ष स्व. महेंद्र कर्मा सहित सभी शहीदों, जवानों व नागरिकों के बलिदान को कभी नहीं भूलेगा। इस मौके पर उन्होंने शहीदों के परिजनों से भेंट कर उन्हें सम्मानित भी किया। शहीदों के परिवारजनों ने झीरम की पवित्र माटी को सहेजने के लिए पुलिस प्रशासन को सौंपा।
हिंसा के दौर का अंत, बस्तर में लहराया तिरंगा
विजय शर्मा ने कहा कि जिस असामाजिक ताकत ने बस्तर को दशकों तक डर और हिंसा के साये में रखा, वह अब खत्म हो चुकी है। उन्होंने जानकारी दी कि तीन दिवसीय बस्तर तिरंगा यात्रा के माध्यम से 5 जिलों में 600 किलोमीटर की दूरी तय कर शांति का संदेश पहुंचाया गया। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर नक्सलियों के अंतिम गढ़ माने जाने वाले कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों पर राष्ट्रध्वज फहराकर यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि देश के हर कोने में अब भारत का संविधान ही चलेगा।
पुनर्वास से मुख्यधारा में लौट रहे युवा
गृह मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि बस्तर को बंदूक की नोक पर नहीं, बल्कि विकास और जन-विश्वास के बल पर जीता गया है। भटके हुए युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए चलाई जा रही सरकारी योजनाओं का ही नतीजा है कि 3 हजार से अधिक लोगों ने हिंसा का मार्ग छोड़कर पुनर्वास का रास्ता चुना है। बस्तर अब खुली हवा में सांस लेते हुए शांति और प्रगति की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
















