मुख्यमंत्री सुशासन शिविर : किसान भवन सिंह की लंबी प्रतीक्षा का हुआ सुखद अंत

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की ‘सुशासन तिहार’ पहल अब केवल सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि आम जनता की समस्याओं के समाधान का एक प्रभावी केंद्र बन चुकी है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में इन शिविरों के माध्यम से प्रशासन सीधे जनता के द्वार तक पहुँच रहा है। हाल ही में ग्राम पंचायत सेमरदर्री में आयोजित एक शिविर ने किसान भवन सिंह के जीवन की एक बड़ी चिंता को मिनटों में दूर कर दिया।
वर्षों की भागदौड़ और किसान किताब की उलझन
मरवाही विकासखंड के ग्राम नाका के रहने वाले किसान भवन सिंह लंबे समय से अपनी ऋण पुस्तिका (किसान किताब) बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे थे। किसान किताब न होने के कारण उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था:
खेती-किसानी से जुड़े कार्यों में तकनीकी बाधाएं आ रही थीं।
सरकारी योजनाओं और कृषि अनुदान का लाभ लेने में वे असमर्थ थे।
बैंक से संबंधित कार्यों में भी उन्हें निरंतर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
शिविर में हुआ ‘ऑन द स्पॉट’ समाधान
जब भवन सिंह को सेमरदर्री में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर का पता चला, तो वे अपनी समस्या लेकर वहां पहुँचे। राजस्व विभाग के अधिकारियों ने मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए तत्काल कार्रवाई की:
भवन सिंह के आवेदन को प्राथमिकता पर लिया गया।
मौके पर ही उनके दस्तावेजों का सत्यापन किया गया।
प्रशासनिक प्रक्रियाओं को त्वरित गति से पूरा कर उन्हें तुरंत उनकी नई किसान किताब सौंप दी गई।
सुशासन से खिली किसान के चेहरे पर मुस्कान
अपनी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान मात्र कुछ ही समय में पाकर भवन सिंह भावुक हो गए। उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह शिविर उनके जैसे छोटे किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। अब वे बिना किसी अड़चन के खेती कर सकेंगे और सरकारी सुविधाओं का पूरा लाभ उठा पाएंगे।
निष्कर्ष: भवन सिंह का यह अनुभव इस बात का प्रमाण है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो शासन की मंशा अंतिम व्यक्ति तक जरूर पहुँचती है। ‘सुशासन तिहार’ आज प्रदेश में पारदर्शिता और त्वरित न्याय का पर्याय बन चुका है।
















