बारनावापारा अभयारण्य में 3 चीतलों की मौत : वन मंत्री केदार कश्यप सख्त, वैज्ञानिक जांच के आदेश

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बारनावापारा वन्यजीव अभयारण्य में तीन चीतलों के मृत पाए जाने के बाद वन विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में कहा है कि वन्यप्राणियों की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही को बिल्कुल भी सहन नहीं किया जाएगा। मंत्री ने पूरे मामले की निष्पक्ष और वैज्ञानिक पद्धति से जांच करने के साथ ही जंगलों में गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
आपसी लड़ाई और हिंसक हमले की आशंका
वन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, बारनावापारा के रामपुर चारागाह (पकरीद बीट) में नियमित पेट्रोलिंग के दौरान अलग-अलग दिनों में ये चीतल मृत अवस्था में मिले:
दो नर चीतलों की मौत: 7 जुलाई को दो नर चीतल मृत पाए गए थे। सरकारी पशु डॉक्टरों द्वारा किए गए शुरुआती पोस्टमार्टम में इनके गले पर चोट के निशान मिले हैं, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि दोनों की मौत आपसी लड़ाई (संघर्ष) के कारण हुई है। उनके शरीर पर किसी शिकारी जानवर के हमले के लक्षण नहीं दिखे हैं।
तीसरे चीतल पर हमला: इसके अगले दिन यानी 8 जुलाई को उसी इलाके में एक और चीतल का शव मिला। इसके गले पर किसी हिंसक वन्यजीव के हमले के गहरे निशान मिले हैं। हालांकि, चीतल के सींग, खाल और सभी अंग सुरक्षित पाए जाने के कारण अवैध शिकार की संभावना से इनकार किया गया है।
सुरक्षा के लिए बढ़ाए गए कदम और ट्रैप कैमरे
इस घटना के बाद से वन विभाग ने पूरे परिक्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। वन्यजीवों के प्राकृतिक रहवास में बिना किसी खलल के उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए घटनास्थल के आसपास ट्रैप कैमरे लगा दिए गए हैं।
वन विभाग का कहना है कि तीनों चीतलों के शवों का विधिवत पोस्टमार्टम करा लिया गया है। मौत की असली वजह क्या थी, इसकी आधिकारिक और सटीक पुष्टि पूरी वैज्ञानिक जांच तथा विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगी। विभाग वन्यजीवों के संरक्षण को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता मानकर आगे की कार्रवाई कर रहा है।
















