धमतरी का ‘नारी’ गाँव : बुनकरी से बदली ग्रामीण महिलाओं की तकदीर

धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले का एक छोटा सा गाँव ‘नारी’ आज महिला सशक्तिकरण और आर्थिक स्वावलंबन की नई इबारत लिख रहा है। यहाँ की ग्रामोदय बुनकर सहकारी समिति ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग मिले, तो ग्रामीण महिलाएं न केवल अपनी परंपरा को सहेज सकती हैं, बल्कि उसे लाभ का जरिया भी बना सकती हैं।
संबलपुरी कला का नया केंद्र
आमतौर पर संबलपुरी बुनाई ओडिशा की पहचान मानी जाती है, लेकिन नारी गाँव की महिलाओं ने इस जटिल कला को अपनाकर बाजार में अपनी धाक जमा ली है। अपनी विशिष्ट ‘इकत’ शैली और चटक रंगों के लिए मशहूर इन साड़ियों को बनाने के लिए जिस बारीकी और धैर्य की जरूरत होती है, उसमें यहाँ की महिलाएं अब माहिर हो चुकी हैं। पड़ोसी राज्य ओडिशा में इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए समिति ने इस पारंपरिक कौशल को आय का मुख्य जरिया बनाया।
सरकारी प्रोत्साहन से मिली नई गति
इस सफलता के पीछे छत्तीसगढ़ शासन की योजनाओं का बड़ा हाथ है। शासकीय वस्त्र उत्पादन कार्यक्रम के तहत समिति को न केवल कच्चा माल (धागा) उपलब्ध कराया जा रहा है, बल्कि:
आधुनिक प्रशिक्षण: महिलाओं को नई बुनाई तकनीकों में प्रशिक्षित किया गया।
तकनीकी अपग्रेड: पुराने करघों की जगह नए और उन्नत करघे प्रदान किए गए, जिससे उत्पादन क्षमता में भारी इजाफा हुआ।
आर्थिक सुरक्षा: समितियों को सेवा प्रभार और बुनकरों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया गया।
व्यापार और आर्थिक प्रगति के आंकड़े
आज यह समिति महज एक छोटा समूह नहीं, बल्कि एक सफल बिजनेस मॉडल बन चुकी है।
उत्पादन: वर्तमान में यहाँ हर महीने 300 से 400 साड़ियों का निर्माण हो रहा है।
टर्नओवर: समिति का मासिक कारोबार 3 से 4 लाख रुपये तक पहुँच गया है।
आय में वृद्धि: पहले जहाँ महिलाएं प्रतिदिन 300-350 रुपये कमा पाती थीं, वहीं अब उनकी दैनिक आय बढ़कर 550-600 रुपये हो गई है। आगामी कौशल विकास कार्यक्रमों के बाद इसे 1,000-1,200 रुपये तक पहुँचाने का लक्ष्य है।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
नारी गाँव की यह पहल केवल पैसों तक सीमित नहीं है। इसने ग्रामीण महिलाओं के भीतर निर्णय लेने की क्षमता और आत्मविश्वास का संचार किया है। जो महिलाएं कभी घर की दहलीज तक सीमित थीं, वे आज कुशल उद्यमी के रूप में उभर रही हैं।
“नारी गाँव की सफलता यह दर्शाती है कि जब सामुदायिक प्रयास और सरकारी नीतियों का तालमेल होता है, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को वैश्विक पहचान मिल सकती है।”
भविष्य की योजना: आने वाले समय में यदि इन उत्पादों को डिजिटल प्लेटफॉर्म, बेहतर ब्रांडिंग और ई-कॉमर्स से जोड़ा जाता है, तो ग्राम नारी की ये साड़ियाँ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी चमक बिखेरने के लिए तैयार हैं। यह समिति आज प्रदेश के अन्य गाँवों के लिए प्रेरणा का एक जीवंत उदाहरण बन गई है।
















