छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में जनजातीय धरोहरों को सहेजने की पहल : डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने किया मूलभूत सुविधाओं के विकास का वादा

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले के वनांचल क्षेत्र पानाबरस में हाल ही में आदिम आस्था स्थलों के संरक्षण और जनजातीय संस्कृति सुरक्षा अभियान के तहत एक विशाल महासभा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के उप मुख्यमंत्री व जिले के प्रभारी मंत्री विजय शर्मा और राजनांदगांव के सांसद संतोष पांडे ने शिरकत की। महासभा में पूरे क्षेत्र से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के मांझी, गायता, ग्राम पटेल और समाज प्रमुख एकजुट हुए।

पारंपरिक रीति-रिवाजों से हुआ स्वागत

कार्यक्रम की शुरुआत पूरी तरह से आदिवासी रीति-रिवाज, परंपरा और देव पूजा के साथ हुई। स्थानीय समाज ने अतिथियों का पारंपरिक ढंग से आत्मीय स्वागत किया, जिसमें आदिवासी संस्कृति की जीवंत झलक देखने को मिली। इस दौरान जनजातीय समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पूर्वजों की आस्था और उनके पूजनीय स्थलों के संरक्षण तथा संवर्धन को लेकर गंभीर मंथन किया गया।

समाज प्रमुखों से सीधा संवाद और बुनियादी विकास का भरोसा

महासभा के दौरान उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने आदिवासी समाज के प्रमुखों (मांझी, गायता और ग्राम प्रमुखों) से सीधे बात की। उन्होंने समाज की पारंपरिक व्यवस्थाओं और धार्मिक मान्यताओं को गहराई से समझा।

डिप्टी सीएम ने स्पष्ट किया कि आदिवासी समाज की संस्कृति और देवस्थल राज्य की अनमोल धरोहर हैं, जिन्हें सुरक्षित रखना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने घोषणा की कि वनांचल और पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित सभी देवगुड़ियों, आस्था केंद्रों और पूर्वजों के स्मृति स्थलों को चिह्नित किया जाएगा। इसके बाद इन स्थानों पर पहुँच मार्ग (सड़क), पेयजल और बैठने की व्यवस्था जैसी सभी जरूरी बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि युवा पीढ़ी अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी रहे।

युवा पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने का आह्वान

शर्मा ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार जनजातीय परंपराओं को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने समाज के बुजुर्गों और प्रमुखों से अपील की कि वे अपनी नई पीढ़ी को स्थानीय बोली, रीति-रिवाजों और संस्कृति से जोड़े रखने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।

इसी क्रम में सांसद संतोष पांडे ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जनजातीय समाज की सांस्कृतिक पहचान और उनके देवस्थलों की सुरक्षा सीधे तौर पर समाज के आत्मसम्मान से जुड़ी है। उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य दोनों ही सरकारें विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के जरिए जनजातीय समाज के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर काम कर रही हैं।

कार्यक्रम के अंत में आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने शासन द्वारा संस्कृति और आस्था केंद्रों के संरक्षण के लिए किए जा रहे इन प्रयासों की सराहना की। इस मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह, उपाध्यक्ष भोजेश शाह मांडवी सहित कई जनप्रतिनिधि और क्षेत्र के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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