छत्तीसगढ़

करोड़ों की सरकारी भूमि पर बना ‘कमोदा रिसॉर्ट’ जमींदोज, प्रशासन ने हटाया अवैध कब्जा

अंबिकापुर। सरगुजा जिले में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन का सख्त रुख बरकरार है। सोमवार सुबह जिला प्रशासन की टीम भारी पुलिस बल के साथ कमोदा रिसॉर्ट पहुँची और सरकारी जमीन पर किए गए अवैध निर्माण को बुलडोजर चलाकर ढहा दिया। बताया जा रहा है कि यह रिसॉर्ट लगभग 45 डिसमिल सरकारी भूमि को दबाकर बनाया गया था, जिसकी बाजार में कीमत करोड़ों रुपये आँकी जा रही है।

दो दिनों की मोहलत के बाद हुई कार्रवाई

इससे पहले शनिवार को जब प्रशासन की टीम अतिक्रमण हटाने पहुँची थी, तब काफी हंगामा हुआ था। पूर्व कैबिनेट मंत्री अमरजीत भगत भी मौके पर पहुँचे थे और कार्रवाई का विरोध किया था। उस वक्त रिसॉर्ट संचालकों ने एसडीएम से दो दिन का समय माँगा था। समय सीमा समाप्त होते ही आज सुबह 6:30 बजे राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम ने मोर्चा संभाला और विवाद की स्थिति के बीच सफलतापूर्वक सरकारी जमीन को मुक्त कराया।

अदालती आदेश की अनदेखी पड़ी भारी

जानकारी के अनुसार, इस अतिक्रमण की शिकायत लंबे समय से जिला प्रशासन को मिल रही थी। अक्टूबर 2025 में तहसील न्यायालय ने स्पष्ट आदेश जारी किया था कि रिसॉर्ट का एक बड़ा हिस्सा सरकारी जमीन पर अवैध रूप से खड़ा है। बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद जब संचालकों ने कब्जा नहीं हटाया, तब प्रशासन को कड़ा कदम उठाना पड़ा।

शरणार्थी जमीन की रजिस्ट्री पर भी गहराया विवाद

अतिक्रमण के अलावा, रिसॉर्ट की जमीन की खरीद-फरोख्त भी जांच के घेरे में है। आरोप है कि रिसॉर्ट का एक हिस्सा उन जमीनों पर बना है जो बंगालियों को शरणार्थी के रूप में आवंटित की गई थीं। मूल आवंटियों के परिजनों ने सरगुजा कलेक्टर से शिकायत की है कि यह रजिस्ट्री नियमों के विरुद्ध की गई है। फिलहाल प्रशासन इस पहलू की भी बारीकी से जांच कर रहा है।

सरगुजा में अतिक्रमणकारियों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

कलेक्टर अजीत वसंत के निर्देश पर जिले में भू-माफियाओं और अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ अभियान तेज हो गया है। पिछले एक महीने के भीतर:

रिंग तालाब: अवैध रूप से पाटी गई मिट्टी को हटाकर तालाब को पुनर्जीवित किया गया।

नाला अतिक्रमण: एक होटल संचालक द्वारा नाले पर बनाई गई बाउंड्री वॉल को तोड़ा गया।

वन भूमि: वन विभाग ने सरकारी जंगलों में बने अवैध मकानों को ध्वस्त किया।

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