छत्तीसगढ़ विधानसभा में गूँजा NHM भर्ती विवाद : 103 आवेदकों में से 98 हुए रिजेक्ट, सॉफ्टवेयर पर उठे सवाल

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत बिलासपुर जिले में की गई संविदा नियुक्तियों को लेकर सदन में भारी हंगामा हुआ। कोटा क्षेत्र के विधायक अटल श्रीवास्तव ने फीडिंग डिमॉन्स्ट्रेटर के पदों पर भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और ऑनलाइन पोर्टल की खामियों का मुद्दा उठाया। इस पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सरकार की ओर से लिखित स्पष्टीकरण पेश किया।
सिर्फ 5 उम्मीदवार मिले योग्य
स्वास्थ्य मंत्री द्वारा दिए गए विवरण के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिलासपुर के पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में फीडिंग डिमॉन्स्ट्रेटर के कुल 3 पदों के लिए विज्ञापन निकाला गया था। इसके लिए 103 बेरोजगारों ने आवेदन किया था, लेकिन स्क्रूटनी के बाद इनमें से केवल 5 अभ्यर्थियों को ही योग्य पाया गया, जबकि शेष 98 आवेदन निरस्त कर दिए गए।
एक छोटी सी तकनीकी चूक और 94 अभ्यर्थी बाहर
भर्ती प्रक्रिया में सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि: 94 आवेदकों को सिर्फ इसलिए अयोग्य ठहरा दिया गया क्योंकि उन्होंने ऑनलाइन फॉर्म भरते समय अपनी शैक्षणिक योग्यता के नंबर (अंक) दर्ज नहीं किए थे।
4 अन्य आवेदकों को दोबारा आवेदन करने, दस्तावेजों में कमियां होने या तय योग्यता पूरी न करने की वजह से बाहर किया गया।
विपक्ष का सवाल: विधायक अटल श्रीवास्तव ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि अगर शैक्षणिक अंकों का कॉलम अनिवार्य था, तो पोर्टल ने अधूरे फॉर्म को स्वीकार (Submit) कैसे होने दिया? उन्होंने सॉफ्टवेयर बनाने वाली एजेंसी पर कार्रवाई की मांग भी की।
सरकार ने दी सफाई: “नियमों के तहत हुई कार्रवाई”
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने विभागीय कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि भर्ती के विज्ञापन (कंडिका 1.28) में पहले ही साफ कर दिया गया था कि अपूर्ण आवेदनों को सीधे खारिज कर दिया जाएगा। जिला चयन समिति ने इसी नियम का पालन किया है और इसमें किसी भी स्तर पर कोई मनमानी नहीं हुई है।
NHM के तहत 146 पदों की भर्ती अब भी अधूरी
सदन में यह जानकारी भी सामने आई कि बिलासपुर जिले में NHM के तहत 27 अलग-अलग श्रेणियों में कुल 146 संविदा पदों पर भर्ती होनी है, जिसकी स्थिति फिलहाल इस प्रकार है:
06 श्रेणियों में ही अब तक नियुक्तियां पूरी हो सकी हैं।
09 संवर्गों के लिए फिलहाल दावा-आपत्ति की सूची जारी की गई है।
शेष पदों के लिए आए आवेदनों की स्क्रूटनी का काम अभी भी प्रक्रियाधीन है।
पारदर्शिता पर खड़े हुए सवाल
एक ही तरह की गलती के कारण इतनी बड़ी संख्या में आवेदनों के निरस्त होने से अब ऑनलाइन आवेदन प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं। विपक्ष का कहना है कि यह केवल अभ्यर्थियों की लापरवाही नहीं बल्कि सिस्टम का फॉल्ट भी हो सकता है, इसलिए इसकी प्रशासनिक और तकनीकी जांच होनी चाहिए। वहीं सरकार इसे पूरी तरह नियमानुसार बता रही है।
















