देश-विदेश

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर विराम : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताई वजह

नई दिल्ली (एजेंसी)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने म्यूनिख लीडर्स मीटिंग 2026 के दौरान कहा कि भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापारिक बातचीत फिलहाल ऐसे मुकाम पर पहुंच गई है जहां आगे की प्रगति कठिन हो गई है। उनके अनुसार, वर्तमान व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में है, जबकि अमेरिका अपने ट्रेड डेफिसिट (व्यापार घाटे) को पाटने की कोशिश कर रहा है।

फरवरी 2026 में घोषित अंतरिम व्यापार समझौते के तहत दोनों देश व्यापक द्विपक्षीय समझौते की दिशा में विचार-विमर्श कर रहे थे। हालांकि, वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान स्थिति में दोनों पक्षों के लिए किसी भी समझौते में रियायतें देना या लेना काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। इसके बावजूद, दोनों देश यह टटोल रहे हैं कि क्या भविष्य में बातचीत की कोई गुंजाइश बाकी है या नहीं।

भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक समझौता

इसी सम्मेलन में वित्त मंत्री ने भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए व्यापार समझौते का उल्लेख करते हुए इसे वैश्विक स्तर पर एक मिसाल बताया। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के शब्दों को दोहराते हुए उन्होंने इसे “सभी समझौतों की जननी” करार दिया।

इस वृहद समझौते से दुनिया की लगभग एक-चौथाई जीडीपी और दो अरब लोगों की आबादी वाले बाजार जुड़ेंगे। समझौते के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

भारतीय बाजार की पहुंच: भारत ने अपनी कुल टैरिफ लाइनों का 92.5 प्रतिशत और व्यापार मूल्य का लगभग 97 प्रतिशत हिस्सा यूरोपीय संघ के लिए खोल दिया है।

यूरोपीय संघ की बाजार पहुंच: यूरोपीय संघ ने अपने व्यापार मूल्य का लगभग 99 प्रतिशत और 97 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को भारतीय सामानों के लिए खोल दिया है।

रणनीतिक संतुलन: वित्त मंत्री ने जोर देकर कहा कि इन प्रतिबद्धताओं को तय करते वक्त दोनों अर्थव्यवस्थाओं की परस्पर पूरकता और भारत की घरेलू प्रतिस्पर्धात्मकता पर पड़ने वाले प्रभावों का विशेष ध्यान रखा गया है।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button