रामगढ़ महोत्सव : मुख्यमंत्री ने निहारी विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला, धरोहरों के संरक्षण पर दिया जोर

सरगुजा। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड में स्थित ऐतिहासिक स्थल रामगढ़ पहुंचे। वे यहाँ रामवनगमन पर्यटन परिपथ से जुड़े दो दिवसीय ‘रामगढ़ महोत्सव-2026’ के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने क्षेत्र की समृद्ध ऐतिहासिक और प्राकृतिक विरासत का बारीकी से अवलोकन किया।
ऐतिहासिक गुफाओं और प्राकृतिक धरोहरों का भ्रमण
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने विश्व की सबसे पुरानी नाट्यशाला के रूप में प्रसिद्ध सीताबेंगरा गुफा का दौरा किया और इसकी बेजोड़ वास्तुकला व सांस्कृतिक महत्व की जानकारी ली। इसके साथ ही उन्होंने:
जोगीमारा गुफा: यहाँ मौजूद तीसरी-दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व के प्राचीन शिलालेखों और दुर्लभ भित्तिचित्रों (wall paintings) को देखा।
हाथीपोल: पानी के निरंतर बहाव से बनी लगभग 180 फीट लंबी और 15-20 फीट ऊंची इस अद्भुत प्राकृतिक सुरंग का भी उन्होंने दीदार किया।
इस अवसर पर उनके साथ कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल सहित कई स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद थे।
“सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है रामगढ़” — मुख्यमंत्री
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि रामगढ़ सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि सरगुजा के हजारों साल पुराने इतिहास, कला और आस्था का जीवंत केंद्र है।
“छत्तीसगढ़ की धरती प्राकृतिक संपदा के साथ-साथ अद्भुत पुरातात्विक धरोहरों से भी संपन्न है। रामगढ़ जैसी ऐतिहासिक संपदाओं को सहेजना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। राज्य सरकार इन स्थलों को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर लाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”
क्यों खास है रामगढ़ और यह महोत्सव?
महाकवि कालिदास से जुड़ाव: मान्यता है कि महान कवि कालिदास ने अपनी प्रसिद्ध कृति ‘मेघदूतम्’ की रचना इसी रमणीय स्थल पर की थी। मेघदूतम् की शुरुआत ‘आषाढस्य प्रथमदिवसे’ (आषाढ़ के पहले दिन) से होती है, इसीलिए हर साल आषाढ़ महीने के पहले दिन इस महोत्सव का आयोजन किया जाता है।
अद्वितीय रंगमंच: सीताबेंगरा गुफा लगभग 44 फीट लंबी है, जिसे एक प्राकृतिक रंगमंच (थिएटर) माना जाता है।
रामायण काल से संबंध: रामगढ़ पर्वत पर स्थित इन गुफाओं का संबंध रामायण काल से भी जोड़ा जाता है, जिससे इसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
















