मिडटर्म इलेक्शन : अमेरिकी चुनावों में वोटर आईडी के लिए क्या राष्ट्रीय आपातकाल का सहारा लेंगे ट्रंप?

वॉशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले मतदाता पहचान और नागरिकता की जांच को लेकर बहस एक बार फिर गरमा गई है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इशारा किया है कि चुनावी प्रक्रिया में फोटो आईडी और नागरिकता का प्रमाण अनिवार्य करने के लिए वे ‘राष्ट्रीय सुरक्षा आपातकाल’ का रुख कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने इस बात की कोई आधिकारिक घोषणा या पक्का वादा नहीं किया है।
‘रियल अमेरिकाज वॉयस’ को दिए गए एक इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि क्या सीनेट में ‘सेव अमेरिका एक्ट’ अटकने की स्थिति में वे आपातकालीन शक्तियों का प्रयोग करेंगे, तो ट्रंप का कहना था कि इतिहास में इससे भी अप्रत्याशित कदम उठाए गए हैं।
सीनेट से विधेयक पास करने की अपील
ट्रंप ने सीनेट से ‘सेव अमेरिका एक्ट’ को जल्द मंजूरी देने का आग्रह किया है। उनका तर्क है कि चुनाव की पवित्रता बनाए रखने के लिए वोटरों से पहचान पत्र और अमेरिकी नागरिकता का सबूत मांगा जाना बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स द्वारा कई बार पास किए जाने के बावजूद, कुछ रिपब्लिकन सीनेटर खुद इस कानून का विरोध कर रहे हैं।
मेल-इन वोटिंग की व्यवस्था पर फिर उठाए सवाल
अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने डाक से होने वाली वोटिंग (Mail-in Voting) प्रणाली पर जमकर हमला बोला। उन्होंने इसे चुनावी गड़बड़ियों के प्रति संवेदनशील बताते हुए कैलिफोर्निया की चुनाव प्रणाली पर भी तंज कसा। ट्रंप के अनुसार, कई इलाकों में रिपब्लिकन समर्थकों को मतपत्र हासिल करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
आपातकालीन कदम और कानूनी पेच
इंटरव्यू में एंकर वेन एलिन रूट ने सुझाव दिया था कि राष्ट्रीय सुरक्षा आपातकाल लागू करके सरकार बिना कांग्रेस की अनुमति के ही फोटो आईडी, नागरिकता प्रमाण और मेल-इन बैलेट पर कड़े नियम थोप सकती है। ट्रंप ने इस विचार को खारिज तो नहीं किया, लेकिन इसे लागू करने की कोई निश्चित समय-सीमा भी नहीं बताई।
सुरक्षा बनाम मतदान अधिकार:
समर्थकों का रुख: ‘सेव अमेरिका एक्ट’ के पैरोकारों का मानना है कि रजिस्ट्रेशन के समय नागरिकता का कागजी सबूत अनिवार्य करने से चुनाव प्रणाली धांधली-मुक्त होगी।
विरोधियों की चिंता: आलोचकों का कहना है कि ऐसे कड़े नियमों से उन वैध अमेरिकी नागरिकों के लिए वोट देना कठिन हो जाएगा जिनके पास तुरंत सभी दस्तावेज मौजूद नहीं होते।
गौरतलब है कि अमेरिकी कानून में गैर-नागरिकों के वोट डालने पर पहले से ही प्रतिबंध है और वहां चुनाव कराने की मुख्य जिम्मेदारी राज्य व स्थानीय सरकारों की होती है। ट्रंप के इस बयान ने राष्ट्रपति शक्तियों और चुनावी सुधारों को लेकर पूरे देश में एक नई कानूनी और राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है।
















