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किम यो जोंग की दो टूक : अमेरिका से बातचीत विकल्प हो सकती है, राष्ट्रीय हित नहीं

सोल (एजेंसी)। उत्तर कोरिया ने अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की वार्ता को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है। देश के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन की प्रभावशाली बहन और वरिष्ठ अधिकारी किम यो जोंग ने कहा है कि अमेरिका के साथ संवाद का रास्ता खुला होना शांति स्थापना का एक जरिया जरूर है, लेकिन प्योंगयांग इसे अपने राष्ट्रीय हितों से ऊपर या अनिवार्य नहीं मानता। उन्होंने वाशिंगटन पर उत्तर कोरिया के खिलाफ अपनी शत्रुतापूर्ण नीतियां जारी रखने का गंभीर आरोप लगाया है।

अमेरिका के इरादों पर जताया संदेह

कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) के हवाले से सामने आए इस बयान में किम यो जोंग ने कहा कि अमेरिका का रुख और उसकी गतिविधियां ऐसी हैं, जो उत्तर कोरिया को उसके वास्तविक उद्देश्यों पर नए सिरे से विचार करने के लिए विवश कर रही हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि हालांकि कूटनीतिक वार्ताओं को शांति के विकल्पों में शामिल किया जा सकता है, किंतु इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि बातचीत को देश के सर्वोच्च राष्ट्रीय हितों के समकक्ष माना जाए।

क्रिप्टोकरेंसी चोरी के आरोपों को नकारा

यह बयान ऐसे संवेदनशील वक्त में सामने आया है जब अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई ने एक बड़े मामले में उत्तर कोरिया का हाथ होने का दावा किया है। एफबीआई के अनुसार, दुनिया के प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज ‘बाइनेंस’ से छह अरब डॉलर से अधिक की डिजिटल मुद्रा चोरी करने में प्योंगयांग की संलिप्तता है।

उत्तर कोरिया ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे महज एक ‘राजनीतिक उकसावा’ करार दिया है। किम यो जोंग ने इस प्रकरण को अमेरिका की प्योंगयांग विरोधी मानसिकता और शत्रुतापूर्ण रवैये का एक ताजा उदाहरण बताया है।

त्रिपक्षीय बैठकों और सैन्य अभ्यास पर आपत्ति

अपने संबोधन में किम ने अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के बीच हाल ही में हुई त्रिपक्षीय विदेश मंत्रियों की बैठक का भी जिक्र किया। इस बैठक में तीनों देशों ने उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण की प्रतिबद्धता दोहराई थी। किम यो जोंग ने इसके अलावा तीनों देशों द्वारा चलाए जा रहे संयुक्त सैन्य अभ्यासों को भी उत्तर कोरिया की सुरक्षा के खिलाफ शत्रुतापूर्ण और आक्रामक कदम बताया।

बातचीत की शर्त: शत्रुतापूर्ण नीति का त्याग

अपने बयान के अंत में किम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि द्विपक्षीय तनाव को दूर करने और किसी भी समाधान तक पहुंचने के लिए सबसे पहली और अहम शर्त यह है कि अमेरिका अपनी आक्रामक और विरोधी नीतियों को छोड़े। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक वाशिंगटन टकराव के अपने पुराने रास्ते को नहीं बदलता, तब तक उत्तर कोरिया के लिए अमेरिका के साथ वार्ता की मेज पर आने का कोई औचित्य नहीं बनता है।

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