छत्तीसगढ़ विधानसभा : धान खरीदी के मुद्दे पर घमासान, गर्भगृह में विपक्षी विधायकों का हंगामा

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मौजूदा सत्र में गुरुवार का दिन काफी हंगामेदार रहा। किसानों से धान खरीदी के मसले को लेकर विपक्ष ने सरकार को जमकर घेरा, जिससे सदन की कार्यवाही में काफी व्यवधान उत्पन्न हुआ।
स्थगन प्रस्ताव नामंजूर होने पर नाराजगी
विपक्ष के नेता डॉ. चरणदास महंत ने धान खरीदी की वर्तमान स्थिति पर चर्चा करने के लिए स्थगन प्रस्ताव पेश किया था। हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष द्वारा इस प्रस्ताव को अस्वीकार किए जाने के बाद सदन में स्थिति तनावपूर्ण हो गई। विपक्ष के सदस्य इस फैसले से असंतुष्ट होकर नारेबाजी करने लगे और विरोध जताते हुए सदन के गर्भगृह तक पहुंच गए।
नियमों के अनुसार, गर्भगृह में प्रवेश करने के कारण विपक्षी विधायकों को स्वतः निलंबित कर दिया गया, जिसके बाद वे सदन से बाहर चले गए।
विपक्ष के गंभीर आरोप
विपक्षी दल ने राज्य सरकार पर धान खरीदी प्रक्रिया में लापरवाही और अनियमितता के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके मुख्य तर्क निम्नलिखित हैं:
खरीदी में गिरावट: विपक्ष का दावा है कि पिछले साल के मुकाबले इस बार धान की आवक और खरीदी के आंकड़ों में भारी कमी आई है।
किसानों का उत्पीड़न: विधायकों ने आरोप लगाया कि सरकार की मंशा धान खरीदने की नहीं थी और जटिल नियमों व प्रक्रियात्मक बाधाओं के जरिए किसानों को परेशान किया गया।
अविश्वास का माहौल: सदन में यह मुद्दा उठाया गया कि किसानों को मदद देने के बजाय प्रशासन उन्हें संदेह की दृष्टि से देख रहा है।
कर्जमाफी या खरीदी की मांग
विपक्ष ने विशेष रूप से सक्ती, जैजैपुर, पामगढ़, अकलतरा और जांजगीर-चांपा जैसे क्षेत्रों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से ऋण लिया है, उनका धान नहीं खरीदा जा रहा है। विपक्ष ने सरकार के सामने दो स्पष्ट विकल्प रखे:
सरकार किसानों का पूरा धान तत्काल खरीदे।
यदि खरीदी संभव नहीं है, तो उन किसानों का कर्ज पूरी तरह माफ किया जाए।
इस हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही को कुछ समय के लिए स्थगित भी करना पड़ा।
















