पुतिन ने की पीएम मोदी के नेतृत्व और भारतीय अर्थव्यवस्था की जमकर तारीफ

सेंट पीटर्सबर्ग (एजेंसी)। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली की खुलकर सराहना की है। पुतिन के अनुसार, भारत वर्तमान में वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शीर्ष पर है। उन्होंने साफ किया कि यह प्रगति रातों-रात नहीं हुई है, बल्कि इसके पीछे प्रधानमंत्री मोदी की नीतियां, सरकार की दूरदर्शिता और भारतीय कार्यबल की कड़ी मेहनत है। उन्होंने भारतीय नागरिकों के कौशल और लगन को इस सफलता का मुख्य आधार बताया।
ऐतिहासिक और रणनीतिक साझेदारी पर जोर
दोनों देशों के आपसी रिश्तों पर बात करते हुए राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि रूस और भारत के बीच ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ है, जो किसी तात्कालिक फायदे के लिए नहीं बल्कि दशकों के भरोसे पर टिकी है। उन्होंने साल 1947 में सोवियत संघ और भारत के बीच शुरू हुए राजनयिक संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि रूस हमेशा से भारत की संप्रभुता और विकास यात्रा में एक सहयोगी के रूप में खड़ा रहा है।
एक नजर में व्यापारिक लक्ष्य:
वर्तमान में भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 58 से 60 अरब डॉलर के स्तर पर है। दोनों देशों ने आने वाले समय में इसे बढ़ाकर 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
बाहरी दबावों से अप्रभावित भारत
रूसी राष्ट्रपति ने भारत को एक संप्रभु और बेहद विश्वसनीय मित्र बताया। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन (अमेरिका) लगातार नई दिल्ली पर रूस के साथ संबंध कम करने का दबाव बनाता रहा है, लेकिन भारत अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखता है। पुतिन ने भरोसा जताया कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत किसी भी बाहरी देश के दबाव में आए बिना स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करता रहेगा।
ऊर्जा और परमाणु सेक्टर में नया विस्तार
सिर्फ पारंपरिक व्यापार ही नहीं, बल्कि दोनों देश भविष्य की ऊर्जा जरूरतों पर भी मिलकर काम कर रहे हैं। पुतिन ने तमिलनाडु की कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना का उदाहरण देते हुए कहा कि हाइड्रोकार्बन, न्यूक्लियर एनर्जी और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में आपसी सहयोग को और गहरा किया जा रहा है, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई मिलेगी।
भारत-चीन मामलों पर रूस का रुख साफ
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में पुतिन ने स्पष्ट किया कि रूस इस द्विपक्षीय मामले में कोई दखल नहीं देगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, दोनों के परिपक्व नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि दोनों नेता संवाद के जरिए आपसी मुद्दों को सुलझाने में सक्षम हैं। वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुए तनाव के बाद से दोनों देश रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और बाहरी हस्तक्षेप इस संवेदनशील मामले को और उलझा सकता है।
















