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मध्य-पूर्व संकट की तपिश : कतर ने भारत को होने वाली गैस सप्लाई में की भारी कटौती

नई दिल्ली (एजेंसी)। पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य संघर्ष का सीधा प्रभाव अब भारत की रसोई और उद्योगों पर पड़ता दिख रहा है। ईरान और अमेरिका-इजरायल गठबंधन के बीच बढ़ते तनाव के कारण दुनिया के प्रमुख गैस निर्यातक देश, कतर ने भारत को होने वाली लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की आपूर्ति में 10% से 40% तक की कमी कर दी है। इस अचानक आई कटौती ने भारतीय ऊर्जा बाजार में हलचल पैदा कर दी है।

उत्पादन ठप होने का मुख्य कारण

हालिया रिपोर्टों के अनुसार, कतर में स्थित प्रमुख गैस बुनियादी ढांचों— रास लफ़्फ़ान और मेसाईद इंडस्ट्रियल सिटी— को ड्रोन और मिसाइल हमलों से निशाना बनाया गया है। सुरक्षा संबंधी खतरों और तकनीकी खराबी की आशंका के चलते कतर को अपना उत्पादन अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है।

भारत की बढ़ती चिंताएं

भारत अपनी गैस जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा कतर से आयात करता है। वर्तमान स्थिति का प्रभाव कुछ इस प्रकार पड़ रहा है:

सप्लाई चेन पर दबाव: भारत सालाना लगभग 27 मिलियन टन LNG आयात करता है, जिसका 40% हिस्सा अकेले कतर से आता है।

क्षेत्रीय प्राथमिकता: पेट्रोनेट LNG और गेल (GAIL) जैसी कंपनियां अब औद्योगिक इकाइयों के बजाय CNG और पाइप वाली रसोई गैस (PNG) को प्राथमिकता दे रही हैं, ताकि आम जनता पर सीधा बोझ न पड़े।

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का संकट: यह समुद्री मार्ग भारत के लिए लाइफलाइन है। वर्तमान में यहाँ से होने वाला शिपमेंट लगभग ठप है, जिससे न केवल देरी हो रही है बल्कि बीमा और शिपिंग की लागत भी आसमान छू रही है।

बाजार पर आर्थिक प्रभाव

सप्लाई में कमी और युद्ध के खतरों ने गैस की कीमतों को भड़का दिया है:

विवरण, प्रभाव

स्पॉट मार्केट दरें,कीमतें लगभग 25 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट तक पहुँच गई हैं।
लागत में वृद्धि,वर्तमान दरें पुराने दीर्घकालिक समझौतों की तुलना में लगभग दोगुनी हैं।
घरेलू असर,खाद (फर्टिलाइजर) और बिजली उत्पादन की लागत बढ़ने की संभावना है।

भारत अब कतर के विकल्प के रूप में अन्य देशों से स्पॉट मार्केट के जरिए गैस खरीदने पर विचार कर रहा है, हालांकि वैश्विक स्तर पर बढ़ी हुई कीमतें सरकार और कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

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