मध्यप्रदेश

भोपाल-इंदौर मेट्रो : दो-तिहाई काम खत्म, टूरिज्म और स्कूल ट्रिप्स से बढ़ेगी यात्रियों की संख्या

भोपाल (एजेंसी)। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल और इंदौर मेट्रो परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को बचे हुए काम तय वक्त पर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि घनी आबादी वाले इलाकों और कामकाजी लोगों के सफर को आसान बनाने में मेट्रो बेहद मददगार साबित हो रही है। मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि दोनों शहरों में मेट्रो में सफर करने वाले मुसाफिरों की तादाद बढ़ाने के लिए पर्यटन विभाग (Tourism Department) की मदद ली जानी चाहिए।

समीक्षा बैठक में नगरीय विकास और आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी और मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

स्कूल-कॉलेज के छात्रों को मेट्रो से जोड़ने की योजना

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मुताबिक, इंदौर और भोपाल अब मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों के रूप में विकसित हो रहे हैं। ऐसे में विद्यार्थियों और आम नागरिकों को मेट्रो के जरिए प्रमुख धार्मिक स्थलों, ऐतिहासिक धरोहरों, पर्यटन केंद्रों और टाइगर रिजर्व की सैर कराने के इंतजाम किए जाने चाहिए। इस पहल से न सिर्फ मेट्रो का इस्तेमाल बढ़ेगा, बल्कि छात्रों को सीखने का मौका भी मिलेगा। इन योजनाओं को अमलीजामा पहनाने में पर्यटन विभाग और मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (MAPCOST) मिलकर काम करेंगे।

भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट का अपडेट

पहला चरण: सुभाष नगर से एम्स के बीच 7.1 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर दिसंबर 2025 से मेट्रो दौड़ रही है, जिसमें 8 एलिवेटेड स्टेशन शामिल हैं।

दूसरा चरण: सुभाष नगर से करोंद चौराहा (9.64 किमी) के बीच का काम जून 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसमें 6 एलिवेटेड और 2 अंडरग्राउंड (भूमिगत) स्टेशन बनेंगे।

तीसरा चरण: भदभदा चौराहा से रत्नागिरी चौराहा के बीच 14.16 किलोमीटर लंबे हिस्से पर काम चल रहा है, जिसमें 13 एलिवेटेड स्टेशन होंगे। यह काम अगले दो सालों में पूरा हो जाएगा।

इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट का अपडेट

शुरुआती सफलता: गांधी नगर से सुपर कॉरिडोर-3 (5.26 किमी) के बीच मई 2025 में ही मेट्रो सेवा शुरू हो चुकी है।

रीच-2 का काम: सुपर कॉरिडोर-3 से मालवीय नगर चौराहे (11.43 किमी) तक का काम लगभग आखिरी चरण में है।

आगामी विस्तार: शहीद बगीचा से खजराना चौराहा और एयरपोर्ट से गांधी नगर के बीच के बचे हुए हिस्से जून 2028 तक तैयार हो जाएंगे। इसके बाद खजराना से एयरपोर्ट के बीच 11.59 किलोमीटर लंबे रूट पर काम किया जाएगा।

विशेष: बैठक के दौरान दोनों शहरों में यातायात को और बेहतर बनाने के लिए भविष्य में बनने वाले फ्लाईओवर्स, सड़कों और मेट्रो रूट के आपसी तालमेल पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

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