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भारत में एलएनजी आपूर्ति बाधित : गुजरात गैस और पेट्रोनेट ने घोषित किया ‘फोर्स मेज्योर’

नई दिल्ली (एजेंसी)। मध्य पूर्व (वेस्ट एशिया) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर गहरा संकट मंडराने लगा है। पेट्रोनेट एलएनजी के बाद, देश की प्रमुख गैस वितरण कंपनी गुजरात गैस लिमिटेड ने भी ‘फोर्स मेज्योर’ (Force Majeure) लागू करने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है।

संकट की मुख्य वजह: कतर से आपूर्ति ठप

इस संकट की जड़ें कतर के रास लफ्फान संयंत्र में परिचालन रुकने से जुड़ी हैं। सोमवार को एक ईरानी ड्रोन हमले के बाद इस प्लांट को बंद करना पड़ा, जो वैश्विक एलएनजी आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा नियंत्रित करता है। भारत अपनी कुल एलएनजी जरूरतों का करीब आधा हिस्सा कतर से ही आयात करता है, जिसके कारण भारतीय बाजार पर इसका सीधा और गंभीर असर पड़ा है।

गुजरात गैस पर प्रभाव

कंपनी ने शेयर बाजार को सूचित किया है कि रीगैसिफाइड लिक्विफाइड नेचुरल गैस (RLNG) की उपलब्धता में भारी कमी आई है। इसके परिणामस्वरूप:

सप्लाई पर रोक: 6 मार्च से गैस की मात्रा सीमित कर दी जाएगी।

बीमा की स्थिति: कंपनी ने स्पष्ट किया है कि उनके मौजूदा बीमा कवर में युद्ध जैसी स्थितियाँ शामिल नहीं हैं।

व्यापक असर: गुजरात गैस के पास लगभग 4,430 औद्योगिक और 2.27 मिलियन घरेलू उपभोक्ता हैं, जिन पर इस अनिश्चितता का प्रभाव पड़ सकता है।

पेट्रोनेट एलएनजी की स्थिति

भारत की सबसे बड़ी गैस आयातक पेट्रोनेट ने भी कतर एनर्जी और अपने घरेलू ग्राहकों (GAIL, IOC, BPCL) को फोर्स मेज्योर का नोटिस भेजा है।

कारण: हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सुरक्षा खतरों के कारण कंपनी के जहाज ‘दिशा’, ‘राही’ और ‘असीम’ कतर के लोडिंग पोर्ट तक नहीं पहुँच पा रहे हैं।

बाजार की प्रतिक्रिया: इस खबर के बाद पेट्रोनेट के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई, जो एक समय 11.7% तक टूट गए थे।

क्या होता है ‘फोर्स मेज्योर’?

‘फोर्स मेज्योर’ एक कानूनी प्रावधान है जिसे तब लागू किया जाता है जब कोई पक्ष प्राकृतिक आपदा, युद्ध या किसी ऐसी अप्रत्याशित घटना के कारण अनुबंध की शर्तों को पूरा करने में असमर्थ होता है जो उसके नियंत्रण से बाहर हो।

उद्योग और उपभोक्ताओं पर असर

गैस की कमी का असर औद्योगिक क्षेत्र में दिखने लगा है:

उर्वरक क्षेत्र: इफ्को (IFFCO) और कृभको जैसी कंपनियों के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

सप्लाई कटौती: गेल और इंडियन ऑयल ने फर्टिलाइजर प्लांट्स को दी जाने वाली गैस में पहले ही कटौती शुरू कर दी है।

राहत की बात: वर्तमान में घरेलू रसोई गैस या ऑटोमोबाइल (CNG) क्षेत्र के लिए किसी आधिकारिक कटौती की घोषणा नहीं की गई है।

भारत की ऊर्जा निर्भरता का एक बड़ा हिस्सा आयातित एलएनजी पर टिका है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने 2.7 करोड़ टन एलएनजी आयात की थी, जिसका एक बड़ा भाग अब क्षेत्रीय विवादों की भेंट चढ़ता दिख रहा है।

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