तेन्दूपत्ता संग्रहण : तीसरे दिन भुगतान और गुणवत्ता वृद्धि के लिए कार्यशाला

रायपुर। छत्तीसगढ़ के ‘हरे सोने’ यानी तेन्दूपत्ता की गुणवत्ता और पैदावार बढ़ाने के लिए वन विभाग ने कमर कस ली है। इसी कड़ी में कोरिया वनमंडल द्वारा बैकुंठपुर के गेज रोपणी परिसर में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य संग्रहण सीजन से पहले वैज्ञानिक तरीके से शाखा-कर्तन (बूटा कटाई) की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना था।
समयबद्ध भुगतान और आर्थिक संबल
वनमंडलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस वर्ष संग्राहकों के हितों का विशेष ध्यान रखा जाए। संग्रहण के दौरान साप्ताहिक खरीदी के तीसरे दिन के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।
आय का साधन: मार्च-अप्रैल का समय ग्रामीणों के लिए रोजगार के लिहाज से चुनौतीपूर्ण होता है, ऐसे में तेन्दूपत्ता संग्रहण उनकी आजीविका का मुख्य आधार बनता है।
पारिश्रमिक: शाखा-कर्तन कार्य के लिए निर्धारित 70 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से भुगतान किया जाएगा, जिसे कार्य पूर्ण होते ही समिति प्रबंधकों द्वारा प्रदान किया जाएगा।
वैज्ञानिक तकनीक से बेहतर उत्पादन
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताया कि फरवरी-मार्च में झाड़ियों की छंटाई क्यों आवश्यक है। वैज्ञानिक पद्धति से की गई कटाई के बाद जो नई पत्तियां निकलती हैं, वे बीड़ी उद्योग के लिए सबसे उत्तम मानी जाती हैं।
प्रशिक्षण: सोनहत और देवगढ़ के अधिकारियों ने फड़मुंशियों और प्रबंधकों को गड्डी बांधने, फड़ चयन और संग्रहण केंद्र की प्रक्रियाओं की तकनीकी जानकारी दी।
लक्ष्य: कोरिया वनमंडल के तहत आने वाली 17 समितियों में मार्च के दूसरे सप्ताह तक शाखा-कर्तन का कार्य अनिवार्य रूप से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
अग्रिम तैयारी और प्रबंधन
जिला यूनियन कोरिया के अध्यक्ष और अन्य अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2026 के सीजन के लिए तैयारियां पुख्ता हैं। उल्लेखनीय है कि कोरिया वनमंडल की सभी लॉट (Lot) की अग्रिम बिक्री पहले ही संपन्न हो चुकी है, जो बाजार में इसकी भारी मांग को दर्शाता है।
इस कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारियों सहित स्व-सहायता समूहों के सदस्यों और समिति पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया, जहाँ उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले पत्ते एकत्र करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
















