छत्तीसगढ़ विधानसभा में ‘चूहा’ और ‘धान’ पर रार : विपक्ष का वॉकआउट, सरकार ने आरोपों को नकारा

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में मंगलवार को धान खरीदी और भंडारण के मुद्दे पर भारी गहमागहमी देखने को मिली। विपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रदेश के संग्रहण केंद्रों में रखा लाखों क्विंटल धान चूहों की भेंट चढ़ गया है, जबकि सरकार ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया।
विपक्ष का हमला: “धान गायब या चूहों का बहाना?”
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव पेश करते हुए चर्चा की मांग की। विपक्ष के मुख्य बिंदु निम्नलिखित थे:
भ्रष्टाचार का आरोप: पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि सुशासन के दावों के बीच लगभग 22.71 लाख क्विंटल धान कम पाया गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विभागीय कमियों को छिपाने के लिए “बेचारे चूहों” को बदनाम किया जा रहा है।
व्यापक शिकायतें: खरसिया विधायक उमेश पटेल ने दावा किया कि पूरे प्रदेश से धान के गायब होने और उसे चूहों द्वारा खाए जाने की खबरें आ रही हैं, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान हुआ है।
सरकार का पक्ष: “आंकड़े पारदर्शी, आरोप निराधार”
खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल ने विपक्ष के आरोपों का पुरजोर जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि सरकार किसानों के हितों के प्रति पूरी तरह सजग है। उनके जवाब के मुख्य अंश:
विवरण,सरकारी आंकड़े
कुल धान खरीदी,149 लाख मीट्रिक टन
लाभान्वित किसान,लगभग 25 लाख
कुल भुगतान,”₹46,277 करोड़”
भंडारण स्थिति,67 हजार टन धान वर्तमान में केंद्रों में सुरक्षित
मंत्री ने स्पष्ट कहा कि “धान को चूहों द्वारा खाने की बात पूरी तरह गलत है।” हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि व्यवस्था में ढिलाई बरतने वाले 78 कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
सदन में हंगामा और निलंबन
जब सभापति ने विपक्ष के स्थगन प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया, तो माहौल और गरमा गया। कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए सदन के गर्भगृह में उतर आए। विधानसभा के नियमों के अनुसार, गर्भगृह में प्रवेश करते ही सभी विपक्षी सदस्य स्वतः निलंबित हो गए, जिसके बाद सदन की कार्यवाही में काफी व्यवधान उत्पन्न हुआ।
















