छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना ने संवारी छबीला की जिंदगी

गरिमापूर्ण विवाह के साथ मिला स्वरोजगार का तोहफा, बीजापुर की बेटी बनी आत्मनिर्भर
रायपुर।
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा चलाई जा रही ‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना’ प्रदेश के जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए एक बड़ा सहारा बनकर उभर रही है। बीजापुर जिले के भोपालपटनम ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम मेट्टुपल्ली की रहने वाली छबीला यालम की कहानी इस बात का जीता-जागता सबूत है। इस योजना ने न केवल छबीला के हाथ पीले करने में मदद की, बल्कि उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने का हौसला भी दिया।

माता-पिता की दूर हुई शादी के खर्च की चिंता

छबीला एक बेहद साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता बाबू यालम और मां सरिता यालम अपनी बेटी को एक बेहतर भविष्य देना चाहते थे, लेकिन जैसे-जैसे बेटी विवाह के योग्य हुई, शादी के भारी-भरकम खर्चों को लेकर उनकी चिंताएं बढ़ने लगीं। सीमित कमाई के चलते एक सम्मानजनक आयोजन कर पाना इस परिवार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया था।

जब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बनीं मददगार

इस मुश्किल घड़ी में स्थानीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शकुंतला मट्टी इस परिवार के लिए उम्मीद की किरण बनकर आईं। उन्होंने यालम परिवार को शासकीय कन्या विवाह योजना की विस्तार से जानकारी दी। इसके बाद उनके सहयोग से परिवार ने इस साल 25 जनवरी को योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदन दर्ज कराया।

सामूहिक मंडप में गूंजी शहनाई

आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, बीते 10 फरवरी को बीजापुर में एक भव्य सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया गया। इसी पंडाल में पूरे रीति-रिवाजों और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच छबीला का विवाह मेट्टुपल्ली के ही रहने वाले पवन वासम के साथ संपन्न हुआ। प्रशासन द्वारा इस पूरे आयोजन की व्यवस्था बेहद गरिमापूर्ण तरीके से की गई थी, जिससे दोनों परिवारों को काफी सम्मान मिला।

आर्थिक सहायता से शुरू किया खुद का काम

इस योजना के तहत छबीला को कुल 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद मिली। इसमें से 15 हजार रुपये विवाह के आयोजन और उपहार सामग्री पर खर्च हुए, जबकि बाकी के 35 हजार रुपये सीधे उनके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दिए गए। छबीला ने इस राशि का बहुत ही समझदारी से इस्तेमाल किया। उन्होंने इन पैसों से एक सिलाई मशीन खरीदी और अपना बुटीक/सिलाई का काम शुरू कर दिया। आज वे घर बैठे कमा रही हैं और अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के बाद बची हुई रकम को भविष्य के लिए बैंक में सुरक्षित रख रही हैं।

कुरीतियों पर प्रहार और सामाजिक बदलाव

यह योजना सिर्फ शादियों में आर्थिक मदद देने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज से दहेज और फिजूलखर्ची जैसी सामाजिक बुराइयों को खत्म करने का एक बड़ा जरिया भी बन चुकी है। सामूहिक विवाह के जरिए समाज में बराबरी और आपसी भाईचारे का संदेश जा रहा है।

आज छबीला आत्मविश्वास के साथ अपनी नई गृहस्थी संभाल रही हैं। इस सरकारी योजना ने न केवल एक गरीब परिवार का बोझ हल्का किया, बल्कि समाज की बेटियों को आत्मनिर्भर बनाकर उनके सपनों को एक नई उड़ान दी है।

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