सरपंच ही हैं ग्रामीण प्रगति के असली ध्वजवाहक : मुख्यमंत्री साय

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने हाल ही में जशपुर जिले से आए सरपंचों के एक प्रतिनिधिमंडल से विधानसभा स्थित अपने कार्यालय में सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने ग्रामीण विकास में स्थानीय नेतृत्व की अहमियत पर जोर दिया और सरपंचों को गाँव की तस्वीर बदलने के लिए प्रेरित किया।
पंच से मुख्यमंत्री तक का सफर: एक प्रेरणा
मुख्यमंत्री ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि सार्वजनिक जीवन में उनका सफर भी एक ‘पंच’ के रूप में ही शुरू हुआ था। उन्होंने कहा:
“मैने स्वयं पंच और फिर सरपंच के रूप में जमीनी स्तर पर काम किया है। यदि एक सरपंच के मन में अपने गाँव के विकास के लिए सच्ची लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो वह अपने क्षेत्र में बड़े बदलाव ला सकता है।”
विकास की धुरी हैं पंचायतें
चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी सरपंचों की होती है। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
बुनियादी ढांचा: पंचायत स्तर पर निर्माण कार्यों और बुनियादी सुविधाओं के विकास में सरपंचों की भूमिका प्राथमिक है।
योजनाओं का क्रियान्वयन: राज्य सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों का लाभ ग्रामीणों को मिले, यह सुनिश्चित करना स्थानीय नेतृत्व का काम है।
आदर्श ग्राम की परिकल्पना: समर्पण और सही योजना के साथ किसी भी पंचायत को एक ‘आदर्श ग्राम’ के रूप में विकसित किया जा सकता है।
अध्ययन भ्रमण: सीखने और सिखाने की पहल
जशपुर जिले से आए 35 सरपंचों का यह दल चार दिवसीय अध्ययन प्रवास पर है। मुख्यमंत्री ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि अन्य विकसित पंचायतों के कार्यों को देखकर उन्हें अपने गाँव में लागू करना चाहिए।
भ्रमण की मुख्य झलकियाँ:
प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्यवाही का अवलोकन किया।
यह दल दुर्ग जिले के पतोरा और धमतरी जिले के सांकरा ग्राम पंचायत का दौरा कर वहां हुए उत्कृष्ट विकास कार्यों को समझेगा।
इस मुलाकात के दौरान विधायक श्रीमती गोमती साय और श्रीमती रायमुनि भगत भी उपस्थित रहीं।
मुख्यमंत्री ने सरपंचों को प्रोत्साहित किया कि वे अपनी समस्याओं और क्षेत्र के मुद्दों के लिए मंत्रियों और अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखें ताकि विकास की गति बनी रहे।
















