छत्तीसगढ़

भारतमाला परियोजना : करोड़ों के मुआवजा घोटाले में फरार पूर्व SDO पुलिस की गिरफ्त में

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित भारतमाला सड़क परियोजना मुआवजा घोटाले में पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। लंबे समय से कानून की नजरों से बचकर भाग रहे तत्कालीन एसडीओ (SDO) और भू-अर्जन अधिकारी निर्भय कुमार साहू को अंततः गिरफ्तार कर लिया गया है। उन पर अपने पद की गरिमा का उल्लंघन कर शासन को करोड़ों रुपये की चपत लगाने का गंभीर आरोप है।

कैसे रचा गया धोखाधड़ी का जाल?

यह पूरा मामला अभनपुर क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया से जुड़ा है। जांच के दौरान यह पाया गया कि आरोपी ने राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों और भू-माफियाओं के साथ मिलकर एक सुनियोजित साजिश रची थी।

जमीन का बँटवारा: नायकबांधा, उगेतरा, उरला और टोकरो जैसे गांवों की जमीन को नियमों के विरुद्ध जाकर बैकडेट (पुरानी तारीखों) में छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटा गया।

अनुचित लाभ: इस प्रक्रिया के जरिए भू-स्वामियों को तय मानकों से कई गुना अधिक मुआवजा राशि का भुगतान किया गया।

पुराना रिकॉर्ड: सबसे चौंकाने वाला खुलासा नायकबांधा जलाशय को लेकर हुआ, जहाँ पहले से अधिग्रहित जमीन को दोबारा परियोजना का हिस्सा बताकर फर्जी तरीके से भुगतान निकाला गया।

कानून का शिकंजा और गिरफ्तारी

गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी निर्भय साहू ने सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) का दरवाजा भी खटखटाया था, लेकिन वहां से जमानत याचिका खारिज होने के बाद उनकी मुश्किलें बढ़ गईं। विशेष अदालत द्वारा वारंट जारी होने के बावजूद वे फरार चल रहे थे, जिसके बाद पुलिस ने घेराबंदी कर उन्हें दबोच लिया।

30 मार्च तक पूछताछ का दौर

न्यायालय ने आरोपी की गंभीरता को देखते हुए उन्हें 30 मार्च 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। जांच टीम को उम्मीद है कि इस रिमांड अवधि के दौरान घोटाले में शामिल अन्य रसूखदार चेहरों और भ्रष्टाचार के इस नेटवर्क की परतों को खोलने में मदद मिलेगी।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button