छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ विधानसभा : औद्योगिक प्रदूषण पर विपक्ष के तीखे सवाल, मंत्री ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में प्रदेश के उद्योगों से होने वाले प्रदूषण का मुद्दा गरमाया रहा। प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष ने राज्य में संचालित उन उद्योगों पर चिंता जताई जो खतरनाक अपशिष्ट (Hazardous Waste) उत्सर्जित कर रहे हैं। विपक्ष ने सरकार से पूछा कि जनस्वास्थ्य को खतरे में डालने वाली इन इकाइयों पर लगाम लगाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं और अब तक किन-किन दोषियों पर गाज गिरी है।

ऑनलाइन मॉनिटरिंग और खर्च पर सवाल

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने जनवरी 2026 तक की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने पूछा कि कितने प्रदूषणकारी उद्योगों में ‘ऑनलाइन एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम’ लगाए गए हैं और इस प्रक्रिया में सरकारी खजाने से कितनी राशि व्यय हुई है। साथ ही, उन्होंने औद्योगिक कचरे के प्रबंधन को लेकर भी सरकार की घेराबंदी की।

मंत्री का जवाब: 665 उद्योग रडार पर

पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने सदन में स्थिति स्पष्ट करते हुए निम्नलिखित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं:

कुल इकाइयां: वर्तमान में प्रदेश में 665 ऐसी औद्योगिक इकाइयां सक्रिय हैं जो खतरनाक अपशिष्ट पैदा करती हैं।

निगरानी तंत्र: बिजली बचाने के लिए रात में ESP (Electrostatic Precipitator) बंद करने की शिकायतों को देखते हुए, 19 बड़े उद्योगों में ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम अनिवार्य रूप से स्थापित किए गए हैं।

लागत: एक सिस्टम लगाने में लगभग 4 से 5 लाख रुपये का खर्च आता है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि इसके लिए विभाग ने अलग से बजट नहीं दिया है, बल्कि उद्योगों से वसूले गए जुर्माने की राशि का ही इसमें उपयोग किया जाता है।

कचरा निपटान के लिए नया प्लांट

भविष्य की योजना साझा करते हुए मंत्री ने बताया कि औद्योगिक कचरे के सही निपटान के लिए 50 एकड़ में एक ‘रीसायकल प्लांट’ तैयार किया गया है। इस प्लांट की विशेषता यह होगी कि यहाँ केवल छत्तीसगढ़ के उद्योगों से निकला कचरा ही डिस्पोज किया जाएगा।

“हम औद्योगिक प्रदूषण को लेकर नियमों को और कड़ा कर रहे हैं। जो भी उद्योग मापदंडों का उल्लंघन करेंगे, उनके खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
— ओपी चौधरी, आवास एवं पर्यावरण मंत्री

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