बस्तर की दौड़ में मुख्यधारा से जुड़े युवाओं का नया कदम

बस्तर। बस्तर क्षेत्र एक नए सकारात्मक बदलाव की ओर अग्रसर है। 22 मार्च को आयोजित होने वाली ‘बस्तर हेरिटेज मैराथन’ महज एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और विश्वास बहाली का एक बड़ा माध्यम बन गई है।
इस गौरवशाली दौड़ में सुकमा जिले के नक्सल पुनर्वास केंद्र के 30 युवा हिस्सा ले रहे हैं। हिंसा का रास्ता त्यागकर समाज की मुख्यधारा में लौटे इन युवाओं के लिए यह मैराथन एक नई शुरुआत है। जिला प्रशासन ने न केवल इन्हें उचित प्रशिक्षण प्रदान किया है, बल्कि उन्हें अपनी छिपी हुई प्रतिभा दिखाने के लिए एक बड़ा मंच भी दिया है। अब ये युवा अंतरराष्ट्रीय स्तर के धावकों के साथ दौड़कर अपनी क्षमता का प्रदर्शन करेंगे।
कभी माओवाद से प्रभावित रहे युवा, जैसे कि पोड़ीयामी हूंगा और कमली ताती (बदला हुआ नाम), आज खेल के मैदान में अपनी नई पहचान बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह परिवर्तन राज्य सरकार की पुनर्वास नीतियों की सफलता को दर्शाता है। जगदलपुर के लालबाग मैदान से शुरू होने वाली इस मैराथन में इनाम की आकर्षक राशि भी रखी गई है, जिसने पूरे देश के खिलाड़ियों को आकर्षित किया है।
इस पहल के जरिए प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि बस्तर की पहचान अब केवल उसके संघर्षों से नहीं, बल्कि उसकी नई खेल प्रतिभाओं, उज्ज्वल भविष्य और सामाजिक समरसता से होगी। ‘बस्तर हेरिटेज मैराथन’ खेल, विकास और नई उम्मीदों का एक अनूठा संगम बन गया है।
















