छत्तीसगढ़

मोहरेंगा नेचर सफारी : रायपुर के पास प्रकृति और रोमांच का नया संगम

रायपुर। छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता में अब एक नया अध्याय जुड़ गया है। राजधानी रायपुर से कुछ ही दूरी पर स्थित मोहरेंगा (खरोरा) में ईको-पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘नेचर सफारी मोहरेंगा’ का विधिवत विस्तार किया गया है। हाल ही में आयोजित एक समारोह में विधायक किरण सिंहदेव, अनुज शर्मा और वरिष्ठ वन अधिकारियों की उपस्थिति में यहाँ जिप्सी सफारी और ठहरने के लिए आधुनिक कॉटेज सुविधाओं का लोकार्पण किया गया।

ईको-पर्यटन और संरक्षण का मेल

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के अनुसार, राज्य सरकार का लक्ष्य केवल पर्यटन का विकास करना नहीं, बल्कि प्रकृति और मनुष्य के बीच एक स्वस्थ संतुलन बनाना है। मोहरेंगा सफारी इसी दिशा में एक बड़ा कदम है, जहाँ पर्यटकों को वन्यजीवों के करीब आने का मौका मिलेगा और स्थानीय समुदायों को रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।

क्या है खास मोहरेंगा नेचर सफारी में?

तिल्दा-खरोरा मार्ग पर स्थित यह सफारी लगभग 500 हेक्टेयर के विशाल क्षेत्र में फैली हुई है। यहाँ की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

रोमांचक जिप्सी सफारी: पर्यटक 10 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर जिप्सी सफारी का लुत्फ उठा सकते हैं।

वन्यजीव दर्शन: यहाँ चीतल, जंगली सूअर, अजगर और खरगोश जैसे जानवरों के साथ-साथ नीलकंठ, कोयल और ईगल जैसे दुर्लभ पक्षियों को देखा जा सकता है।

प्राकृतिक विविधता: यह क्षेत्र साजा, महुआ, अर्जुन और खैर जैसे पेड़ों के साथ-साथ सफेद मुसली और सतावर जैसी औषधीय वनस्पतियों से समृद्ध है।

सुविधाएँ: रात्रि विश्राम के लिए शानदार कॉटेज, नज़ारे देखने के लिए वॉच टॉवर और बच्चों के लिए प्ले एरिया व गार्डन विकसित किए गए हैं।

महिला सशक्तिकरण और स्थानीय विकास

इस परियोजना की सबसे सराहनीय बात इसका सामाजिक पक्ष है। यहाँ स्थित रेस्टोरेंट का संचालन ‘जय माँ अंबे महिला स्व-सहायता समूह’ द्वारा किया जा रहा है। इससे न केवल स्थानीय महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिल रही है, बल्कि पर्यटकों को शुद्ध स्थानीय स्वाद भी मिल रहा है।

पर्यटन के साथ आस्था का केंद्र

सफारी के भीतर ही ‘दोहरा तिहरा माता’ का प्राचीन मंदिर स्थित है, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए यहाँ 16 किलोमीटर की फेंसिंग की गई है और उनके पीने के पानी के लिए सौर ऊर्जा संचालित पंपों की व्यवस्था वाले 8 तालाब और एनीकट बनाए गए हैं।

रायपुर से महज 45 किलोमीटर दूर स्थित मोहरेंगा नेचर सफारी आने वाले समय में छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख ईको-टूरिज्म स्पॉट बनने के लिए तैयार है। यह स्थान उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो शहर के शोर-शराबे से दूर शांति और हरियाली की तलाश में हैं।

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