स्लीमनाबाद जल सुरंग : मध्य प्रदेश की सिंचाई क्रांति को मिलने वाली है नई रफ़्तार

भोपाल (एजेंसी)। मध्य प्रदेश के कृषि और सिंचाई परिदृश्य में एक ऐतिहासिक बदलाव आने वाला है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (NVDA) की महत्वपूर्ण बैठक में प्रदेश की सबसे बड़ी स्लीमनाबाद टनल के निर्माण कार्य की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि लंबित परियोजनाओं को तकनीकी और वित्तीय बाधाएं दूर कर जल्द से जल्द पूरा किया जाए।
परियोजना की मुख्य उपलब्धियां और प्रगति
पिछले दो वर्षों में सरकार ने विशेष सक्रियता दिखाते हुए उन चुनौतियों को हल किया है जो लंबे समय से बाधा बनी हुई थीं। बैठक में साझा किए गए मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
निर्माण की स्थिति: 11.952 किलोमीटर लंबी स्लीमनाबाद टनल का 85% कार्य संपन्न हो चुका है।
तकनीकी विशेषता: यह सुरंग विंध्य पर्वत श्रृंखला की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और उच्च भूजल स्तर जैसी चुनौतियों को पार करते हुए बनाई गई है। यह बिना किसी पंप की सहायता के प्राकृतिक प्रवाह से जल पहुंचाएगी।
सुरक्षा और संवेदनशीलता: सुरंग का निर्माण राष्ट्रीय राजमार्गों और रेलवे लाइनों के नीचे से पूरी सुरक्षा के साथ किया गया है। प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे का कार्य भी संवेदनशीलता के साथ पूरा कर लिया गया है।
सिंचाई विस्तार: 6 जिलों के किसानों को होगा सीधा लाभ
बरगी व्यपवर्तन परियोजना के अंतर्गत बनने वाली यह सुरंग प्रदेश की जीवनरेखा साबित होगी। इससे मुख्य रूप से निम्नलिखित लाभ होंगे:
विस्तृत कमान क्षेत्र: लगभग 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी।
लाभान्वित जिले: जबलपुर, कटनी, सतना, मैहर, पन्ना और रीवा के करीब 1450 गांवों को स्थाई सिंचाई की सुविधा मिलेगी।
नहर की क्षमता: 197 किमी लंबी मुख्य नहर की जल वहन क्षमता 227 क्यूमेक होगी, जो प्रदेश में सर्वाधिक है।
बैठक में लिए गए अन्य महत्वपूर्ण निर्णय
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित इस 270वीं बैठक में कई अन्य सिंचाई परियोजनाओं को भी वित्तीय और प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई:
परियोजना का नाम,जिला/लाभ,स्वीकृत राशि (करोड़ में)
सेल्दामाल माइक्रो लिफ्ट,खंडवा (1410 हेक्टेयर),₹42.95
दूधी सिंचाई परियोजना,”कमांड क्षेत्र विस्तार (60,828 हेक्टेयर)”,₹1925.06
खालवा उद्वहन परियोजना,”क्षेत्र वृद्धि (37,490 हेक्टेयर)”,₹724.10
आईएसपी-कालिसिंध (Phase II),सिंचाई क्षमता (1.10 लाख हेक्टेयर),₹5985.46
डॉ. यादव ने आधुनिक तकनीक के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से न केवल कृषि उत्पादकता बढ़ेगी, बल्कि जल संरक्षण की दिशा में भी राज्य एक नया मानक स्थापित करेगा। बैठक में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
















