अबूझमाड़ के ईरपानार में विकास की नई किरण : दशकों का अंधकार हुआ समाप्त

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सुदूर अबूझमाड़ क्षेत्र के ईरपानार गांव के लिए 25 अप्रैल, 2026 की तारीख ऐतिहासिक बन गई। घने जंगलों और ऊंचे पहाड़ों के बीच बसे इस गांव ने पहली बार बिजली की रोशनी का अनुभव किया। दशकों से अंधेरे में जीवन व्यतीत कर रहे ग्रामीणों के लिए यह केवल बल्ब का जलना नहीं, बल्कि प्रगति के एक नए युग की शुरुआत है।
दुर्गम चुनौतियों को मात देकर पहुँचा उजाला
नारायणपुर जिला मुख्यालय से महज 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होने के बावजूद, ईरपानार तक पहुँचना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। यहाँ के रास्ते
दुर्गम पहाड़ियों और घने वन क्षेत्रों से होकर गुजरते हैं, जहाँ मानसून के दौरान पहुँचना लगभग असंभव हो जाता है।
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के नारायणपुर संभाग ने इस कठिन भौगोलिक स्थिति को चुनौती के रूप में स्वीकार किया। विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच “मिशन मोड” में काम करते हुए इस कार्य को अंजाम दिया।
विकास अभियान की मुख्य बातें
इस विद्युतीकरण परियोजना की सफलता के पीछे प्रशासन और तकनीकी टीम का कड़ा संघर्ष रहा है:
मानवीय श्रम का योगदान: कलेक्टर नम्रता जैन के अनुसार, कई स्थानों पर मशीनों का पहुँचना असंभव था, इसलिए बिजली के खंभे और तार मानव श्रम और स्थानीय लोगों की मदद से पहाड़ियों तक पहुँचाए गए।
परियोजना की लागत: इस कार्य पर कुल ₹56.11 लाख का निवेश किया गया। यह राशि केवल बुनियादी ढांचे पर खर्च नहीं हुई, बल्कि इसने समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया।
समयबद्ध कार्य: तकनीकी टीम ने सीमित संसाधनों के बावजूद एक निश्चित समय सीमा में पोल स्थापना और कनेक्शन का काम पूरा किया।
जीवन में आए बदलाव के संकेत
बिजली के आगमन से न केवल रातें रोशन हुई हैं, बल्कि ग्रामीणों के जीवन स्तर में भी व्यापक सुधार की संभावनाएँ जाग गई हैं:
क्षेत्र,अपेक्षित सुधार
शिक्षा,अब बच्चे रात के समय भी बिना किसी असुविधा के पढ़ाई कर सकेंगे।
संचार,मोबाइल चार्जिंग और इंटरनेट जैसी बुनियादी सुविधाओं तक ग्रामीणों की पहुँच आसान होगी।
सुविधाएँ,”पंखे, बल्ब और छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग से दैनिक जीवन सुलभ होगा।”
भविष्य,”आने वाले समय में यहाँ डिजिटल शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और लघु उद्योगों के द्वार खुलेंगे।”
ग्रामीणों का उत्साह और कृतज्ञता
जब ईरपानार के घरों में पहली बार बिजली के बल्ब जले, तो बच्चों और बुजुर्गों के चेहरों पर मुस्कान साफ देखी जा सकती थी। ग्रामीणों ने बताया कि अब तक उनका जीवन लालटेन और लकड़ियों की रोशनी के भरोसे था। इस ऐतिहासिक परिवर्तन के लिए उन्होंने शासन, प्रशासन और बिजली विभाग के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया।
ईरपानार का विद्युतीकरण अबूझमाड़ क्षेत्र में हो रहे बड़े बदलावों का एक हिस्सा है। शासन की प्राथमिकता अब उन सभी दूरस्थ गाँवों तक सड़क, शुद्ध पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँचाने की है, जो अब तक विकास की दौड़ में पीछे छूट गए थे।
















