अबूझमाड़ के अंतिम छोर तक पहुँची सरकार : ‘लंका’ गाँव में पहली बार लगा प्रशासन का डेरा

नारायणपुर। छत्तीसगढ़ में विकास की धारा अब उन क्षेत्रों तक पहुँच रही है जिन्हें कभी ‘अगम्य’ माना जाता था। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विज़न और जिला प्रशासन की सक्रियता से नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखंड के सुदूरवर्ती गाँव लंका में सुशासन की नई तस्वीर देखने को मिली है। आज़ादी के दशकों बाद, इन्द्रावती नदी के किनारे बसे इस दुर्गम इलाके में पहली बार जिला स्तरीय विशेष शिविर का आयोजन किया गया।
पहाड़ों और नदियों को पार कर ग्रामीणों के बीच पहुँचे अधिकारी
जिला मुख्यालय से लगभग 130 किलोमीटर की कठिन दूरी तय कर प्रशासनिक टीम लंका पहुँची। कभी नक्सलवाद के साये में रहने वाले इस क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए यह एक ऐतिहासिक पल था जब अधिकारी खुद चलकर उनके द्वार तक आए। प्रशासन ने न केवल स्थानीय समस्याओं को गंभीरता से सुना, बल्कि उनका त्वरित समाधान भी सुनिश्चित किया।
‘सुशासन एक्सप्रेस’ ने मिटाई तकनीकी दूरी
इस शिविर का मुख्य आकर्षण ‘सुशासन एक्सप्रेस’ रही। यह वाई-फाई तकनीक से लैस एक मोबाइल सेवा वाहन है, जिसने कनेक्टिविटी की समस्या को खत्म कर दिया। इसके माध्यम से:
जाति, निवास और आय प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज मौके पर ही बनाए गए।
अन्य 27 प्रकार की आवश्यक सेवाओं का लाभ ग्रामीणों को तुरंत मिला।
अब तक इस पहल के जरिए कुल 17,520 आवेदनों का निपटारा कर एक कीर्तिमान स्थापित किया गया है।
मौके पर ही समस्याओं का समाधान
दो दिनों तक चले इस शिविर में लंका और आसपास के पाँच गाँवों के निवासियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। शिविर की सफलता का अंदाजा इन आँकड़ों से लगाया जा सकता है:
कुल प्राप्त आवेदन: 310
तत्काल निराकरण: 242
प्रमुख सेवाएँ: पीएम किसान सम्मान निधि (179 आवेदन), मनरेगा जॉब कार्ड (34), और राशन कार्ड (25)।
नारायणपुर कलेक्टर नम्रता जैन ने इस अवसर पर कहा कि ‘नियद नेल्लानार’ योजना के माध्यम से अबूझमाड़ के सुदूर इलाकों में शासन की पैठ मजबूत हो रही है। उन्होंने घोषणा की कि सुशासन का यह अभियान रुकने वाला नहीं है और अगला पड़ाव 29-30 अप्रैल को आदनार में होगा, जहाँ मलमेटा, कोंजे और बोडुम के ग्रामीणों को सरकारी सेवाओं का सीधा लाभ दिया जाएगा।
















