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सुपर अल नीनो का साया : भारत में भीषण गर्मी के बीच केरल में भारी बारिश का अलर्ट

नई दिल्ली (एजेंसी)। वर्ष 2026 में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है। एक तरफ जहां उत्तर और मध्य भारत रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की चपेट में है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दक्षिण भारत के लिए चेतावनी जारी की है। इस असंतुलित मौसम का मुख्य कारण ‘सुपर अल नीनो’ को माना जा रहा है, जो वैश्विक जलवायु चक्र को तेजी से प्रभावित कर रहा है।

केरल के चार जिलों में ‘येलो अलर्ट’ जारी

भीषण गर्मी के बीच केरल के निवासियों के लिए मौसम विभाग ने अगले 5 दिनों का पूर्वानुमान साझा किया है। IMD के अनुसार, 29 अप्रैल 2026 को राज्य के कुछ हिस्सों में भारी वर्षा की संभावना है। विशेष रूप से निम्नलिखित जिलों में ‘येलो अलर्ट’ घोषित किया गया है:

पथानामथिट्टा

इडुक्की

कुन्नूर

कासरगोड

येलो अलर्ट का महत्व: इसका अर्थ है कि इन क्षेत्रों में 24 घंटों के भीतर 64.5 मिमी से 115.5 मिमी तक बारिश हो सकती है। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों को सतर्क रहने और अचानक होने वाले जलभराव से बचने की सलाह दी है।

क्या है ‘सुपर अल नीनो’?

सामान्य तौर पर, प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान जब औसत से अधिक हो जाता है, तो उसे ‘अल नीनो’ कहा जाता है। लेकिन जब यह तापमान सामान्य से 2°C या उससे अधिक बढ़ जाता है, तो इसे ‘सुपर अल नीनो’ की श्रेणी में रखा जाता है।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार, 2026 में मई से जुलाई के बीच यह स्थिति अपने चरम पर हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पिछले 140 वर्षों के सबसे शक्तिशाली चक्रों में से एक है, जिसके कारण दुनिया भर में मौसम के खतरनाक रूप देखने को मिल रहे हैं।

मॉनसून पर अल नीनो का प्रभाव

भारत की कृषि और अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से मॉनसून पर टिकी है, लेकिन इस बार ‘अल नीनो’ के कारण स्थितियां चुनौतीपूर्ण दिख रही हैं:

अस्थिर प्री-मॉनसून: हालांकि अल नीनो मुख्य मॉनसून को कमजोर करता है, लेकिन इसके संक्रमण काल (जब ला नीना खत्म होकर अल नीनो शुरू होता है) में केरल जैसे राज्यों में बेमौसम और तीव्र बारिश देखने को मिल रही है।

कम बारिश का अनुमान: IMD ने भविष्यवाणी की है कि इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (जून-सितंबर) “सामान्य से कम” रह सकता है। अनुमान है कि पूरे देश में औसत की केवल 92% बारिश ही होगी।

फसलों पर संकट: जुलाई और अगस्त के दौरान जब अल नीनो पूरी तरह सक्रिय होगा, तब बारिश की कमी से धान, गन्ना और दालों जैसी खरीफ फसलों की पैदावार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

क्यों तप रहा है उत्तर और मध्य भारत?

अप्रैल के महीने में ही उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई शहरों में पारा 45-46°C के पार पहुंच गया है। इसके पीछे के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

हीट डोम (Heat Dome): आसमान साफ होने के कारण सूरज की किरणें सीधे धरती पर पड़ रही हैं। बादलों की अनुपस्थिति में गर्म हवा का एक घेरा बन गया है, जो गर्मी को धरातल के पास ही रोक लेता है।

शुष्क हवाएं: उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों से आने वाली सूखी और गर्म हवाओं ने नमी को पूरी तरह खत्म कर दिया है, जिससे लू (Heatwave) का प्रकोप बढ़ गया है।

ला नीना का अंत: साल की शुरुआत में ला नीना का ठंडा प्रभाव समाप्त होने के बाद पृथ्वी तेजी से गर्म चरण में प्रवेश कर गई है, जिससे तापमान में अचानक उछाल आया है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में हमें भविष्य में ऐसे ही चरम मौसम (Extreme Weather) के लिए तैयार रहना होगा।

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