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पश्चिम बंगाल चुनाव : दूसरे चरण का रण, मतुआ वोटरों के हाथ में सत्ता की चाबी

कोलकाता (एजेंसी)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के तहत आज कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों की 147 सीटों पर मतदान प्रक्रिया जारी है। इस चरण को राज्य की सत्ता का प्रवेश द्वार माना जा रहा है, क्योंकि यहाँ का परिणाम ही यह तय करेगा कि कोलकाता के सिंहासन पर कौन विराजमान होगा।

दिग्गजों की साख और आंकड़ों का खेल

इस चरण में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई कद्दावर मंत्रियों की किस्मत ईवीएम में कैद होगी।

इतिहास: 2021 के चुनावों में तृणमूल कांग्रेस ने इन क्षेत्रों में शानदार प्रदर्शन करते हुए 123 सीटों पर कब्जा जमाया था।

बीजेपी की चुनौती: पिछले चुनाव में महज 18 सीटों पर सिमटने वाली भारतीय जनता पार्टी ने इस बार यहाँ अपनी पूरी ताकत झोंक दी है और 100 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है।

महिला मतदाता: पिछले चरण के रुझानों को देखते हुए इस बार भी महिला मतदाताओं की भागीदारी निर्णायक मानी जा रही है, जिनका मतदान प्रतिशत पुरुषों की तुलना में अधिक रहने की उम्मीद है।

मतुआ समुदाय: चुनावी समीकरण का केंद्र

उत्तर 24 परगना और नदिया जिलों में फैला मतुआ समुदाय लगभग 40 सीटों पर हार-जीत का फैसला करता है। एक समय पर तृणमूल का कट्टर समर्थक रहा यह समुदाय 2019 के बाद से भाजपा की ओर झुका है। हालांकि, वर्तमान में यह समुदाय दो गुटों में बंटा नजर आ रहा है।

प्रमुख चिंताएं और मुद्दे:

नागरिकता और मतदाता सूची: सीएए (CAA) के तहत नागरिकता मिलने की धीमी रफ्तार और हालिया मतदाता पुनरीक्षण (SIR) के दौरान लाखों लोगों के नाम सूची से कटना इस बार सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बन गया है।

भविष्य का डर: ठाकुरनगर और बनगांव जैसे इलाकों में कई परिवारों का नाम मतदाता सूची से गायब होने के कारण लोगों में अपने भविष्य को लेकर असुरक्षा की भावना है।

“मेरे माता-पिता का नाम अचानक मतदाता सूची से गायब हो गया है। हमने पिछले चुनावों में मतदान किया था, लेकिन अब हम अपने अस्तित्व को लेकर डरे हुए हैं।” — स्थानीय निवासी का अनुभव

अन्य चुनावी मुद्दे

स्थानीय राजनीति में इस बार भी बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और ‘सिंडिकेट राज’ जैसे विषय हावी हैं। कांग्रेस और विपक्षी नेताओं ने मतदाताओं से निडर होकर अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करने की अपील की है। सुबह से ही पोलिंग बूथों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जो इस चरण की संवेदनशीलता और महत्ता को दर्शाती हैं।

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