छत्तीसगढ़

जशपुर का स्वास्थ्य कायाकल्प : सुदूर गांवों तक पहुंच रही चिकित्सा सुविधा

जशपुर। छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल जशपुर जिले में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य सेवाओं में अभूतपूर्व सुधार किए जा रहे हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य जिले के सुदूर और दुर्गम इलाकों में रहने वाले हर नागरिक तक समय पर और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाना है। इस दिशा में सरकार ने न केवल अधोसंरचना का विकास किया है, बल्कि आपातकालीन सेवाओं को भी आधुनिक बनाया है।

आपातकालीन सेवाओं को मिली नई मजबूती

गंभीर मरीजों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने के उद्देश्य से 1 अप्रैल 2026 को जिले के बेड़े में 23 नई एम्बुलेंस शामिल की गई हैं। इनमें 3 अत्याधुनिक एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (ALS) और 20 बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) एम्बुलेंस शामिल हैं। यह नई व्यवस्था मरीजों को “गोल्डन आवर” में इलाज दिलाने में अत्यंत मददगार साबित हो रही है।

‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य मितान हेल्पलाइन’: संकट में मददगार

मुख्यमंत्री के निर्देश पर संचालित ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य मितान हेल्पलाइन’ आज लोगों के लिए एक बड़ा सहारा बन गई है। बगिया स्थित सीएम कैंप कार्यालय से संचालित इस हेल्पलाइन की कार्यप्रणाली बेहद प्रभावी है:

त्वरित प्रतिक्रिया: कॉल करने के 5 मिनट के भीतर मदद सुनिश्चित की जाती है।

पारदर्शिता: एम्बुलेंस की रियल-टाइम ट्रैकिंग की सुविधा उपलब्ध है।

फॉलोअप: प्रत्येक मामले में 1 से 3 बार फॉलोअप लिया जाता है ताकि मरीज की स्थिति की जानकारी बनी रहे।

प्रभाव: पिछले 26 महीनों में लगभग 3,570 मरीजों ने इस सेवा का लाभ लिया है।

चाहे मोतियाबिंद का ऑपरेशन हो या दिव्यांगों को इलाज, यह हेल्पलाइन जरूरतमंदों की तत्काल सहायता कर रही है।

स्वास्थ्य अधोसंरचना का विस्तार

जिले में चिकित्सा सुविधाओं को दीर्घकालिक बनाने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है:

नया मातृ-शिशु चिकित्सालय: कुनकुरी के गिनाबहार में लगभग 8 करोड़ 77 लाख रुपये की लागत से 50 बिस्तरीय अस्पताल का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है।

भविष्य की योजनाएं: जिले में मेडिकल कॉलेज, शासकीय नर्सिंग कॉलेज, फिजियोथेरेपी कॉलेज और प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र की स्थापना की रूपरेखा तैयार की गई है।

जनजातीय समुदायों के लिए विशेष पहल

विशेष पिछड़ी जनजाति समुदायों को मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने के लिए बगीचा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ‘पहाड़ी कोरवा हेल्पडेस्क’ की स्थापना की गई है।

यहाँ स्थानीय आदिवासी बोलियाँ जानने वाली प्रशिक्षित महिलाएं मरीजों की मदद कर रही हैं, जिससे भाषा की बाधा दूर हुई है।

इस डेस्क की बदौलत अब तक 1450 से अधिक ओपीडी और 900 से अधिक आईपीडी सेवाएं दी जा चुकी हैं।

इसके अलावा, 140 से अधिक सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराए गए हैं। साथ ही, मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से दूरदराज के क्षेत्रों में नियमित रूप से स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।

जशपुर में हो रहे इन नवाचारों और निरंतर प्रयासों से जिले के निवासियों के जीवन स्तर और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में सकारात्मक बदलाव आ रहा है।

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