बस्तर का ऐतिहासिक दौरा : नक्सलवाद की समाप्ति के बाद गृह मंत्री की सुरक्षा समीक्षा

रायपुर। भारत के सुरक्षा इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ने जा रहा है। देश को नक्सलवाद के दंश से मुक्त घोषित करने के बाद, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 19 मई को बस्तर के दौरे पर पहुंच रहे हैं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद यह उनकी पहली यात्रा होगी, जहां वे सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य की रणनीतियों को लेकर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक (High-Level Meeting) की अध्यक्षता करेंगे।
सुरक्षा तंत्र की मजबूती और उपलब्धियां
गृह मंत्री ने पहले भी इस बात पर जोर दिया था कि नक्सलवाद के विरुद्ध केंद्र सरकार की जीरो-टालरेंस नीति और ठोस कदमों ने ही इस सफलता की नींव रखी है।
सुरक्षा किलों का निर्माण: पिछले सात वर्षों में 586 फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन स्थापित किए गए, जिससे सुरक्षा बलों को सामरिक बढ़त मिली।
प्रभावित क्षेत्रों में कमी: आंकड़ों के अनुसार, साल 2014 में जहां 126 जिले नक्सलवाद की चपेट में थे, वहीं चरणबद्ध तरीके से यह संख्या घटकर नगण्य रह गई।
संकल्प से सिद्धि तक का सफर
अमित शाह ने पहले ही यह लक्ष्य निर्धारित किया था कि आगामी DGsP/IGsP कॉन्फ्रेंस से पहले देश को इस आंतरिक सुरक्षा चुनौती से पूरी तरह आजाद कर लिया जाएगा। दशकों पुरानी इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने दोहरी नीति अपनाई:
कठोर सुरक्षा कार्रवाई: सुरक्षा तंत्र को आधुनिक हथियारों और तकनीक से लैस करना।
विचारधारा पर प्रहार: गृह मंत्री के अनुसार, नक्सलवाद का असली कारण केवल गरीबी या विकास की कमी नहीं, बल्कि एक नकारात्मक विचारधारा थी।
31 मार्च 2026 की समयसीमा: सरकार ने 31 मार्च 2026 तक देश को पूर्णतः नक्सल मुक्त करने का जो लक्ष्य तय किया था, उसे हासिल करने के बाद अब बस्तर में होने वाली यह बैठक भविष्य में इस शांति को बरकरार रखने और क्षेत्र के समग्र विकास का रोडमैप तैयार करेगी।
















